बस्तर की बिलोरी पंचायत ने नवजात बेटियों को 2100 और बेटों को 1100 रुपये देकर जागरूकता की नई मिसाल पेश की। पंचायत की महिलाएं परिवारों तक पहुँचकर सम्मान और सहयोग देती हैं।

जीवानंद हलधर - जगदलपुर। बस्तर जिले के जगदलपुर के पास स्थित एक छोटे से गाँव बिलोरी पंचायत ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को नए स्तर पर पहुंचा दिया है। यहाँ जन्म लेने वाली बेटियों और बेटों को सम्मानित कर समाज में जागरूकता का संदेश दिया जा रहा है। पंचायत की महिलाओं की यह पहल पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

बेटी और बेटे दोनों के जन्म पर सम्मान की नई परंपरा
बिलोरी पंचायत की महिलाओं ने एक अनोखी परंपरा शुरू की है-

  • बेटी के जन्म पर 2100 रुपये
  • बेटे के जन्म पर 1100 रुपये

यह किसी सरकारी योजना का हिस्सा नहीं, बल्कि पंचायत की महिलाओं के आपसी सहयोग से चलाया जा रहा सामाजिक अभियान है।

जागरूकता को बढ़ावा: दस्तावेज़ों में न हो देरी
पंचायत की महिलाएं, सरपंच, पंच, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन मिलकर नवजात के घर पहुँचकर परिवार को सम्मान देती हैं, जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड बनवाने के लिए प्रेरित करती हैं, बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण भी कराती हैं। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों में समय पर दस्तावेज़ बनवाने की जागरूकता बढ़ाना है।

गाँव में बदली सोच, बनी नई सामाजिक मिसाल
जहाँ कई जगहों पर बेटी के जन्म को लेकर नकारात्मक भावनाएँ होती हैं, वहीं बस्तर के इस गाँव ने समाज की सोच बदलने का कार्य किया है। अब गाँव में बेटी के जन्म पर गीत गाए जाते हैं, परिवार को सम्मान दिया जाता है, बेटा-बेटी दोनों के जन्म को समान खुशी से मनाया जाता है।

2025 से अब तक 25 परिवारों को मिला सम्मान
पंचायत की सरपंच के अनुसार, वर्ष 2025 से अब तक 25 परिवारों तक सम्मान पहुँचाया जा चुका है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि गाँव के हर परिवार तक जागरूकता पहुँच सके।

आदिवासी क्षेत्र से देश के लिए संदेश
आदिवासी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध बस्तर ने यह साबित किया है कि सामाजिक बदलाव गाँवों से भी शुरू हो सकता है। बिलोरी पंचायत का संदेश स्पष्ट है- 'बेटी है तो कल है और बेटियों को पढ़ाना ही भविष्य का निर्माण है।'