सोमवार को गृहमंत्री ने लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने ब्योरा पेश करने के बाद कहा-आज मैं कह सकता हूं कि, देश नक्सलमुक्त हो चुका है।

रायपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के देश से खात्मे पर सोमवार को  लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब दिया। केंद्रीय गृहमंत्री श्री शाह ने कहा कि, देश के ज्यादातर राज्य साल 2024 में ही नक्सलमुक्त हो गए, लेकिन छत्तीसगढ़ में साल 2018 से लेकर दिसंबर 2023 तक सत्ता में रही कांग्रेस सरकार के असहयोगात्मक रवैये के कारण बस्तर इलाके में लाल आतंक की परछाई बनी रही। इसके साथ ही उन्होंने अब तक चले एंटी नक्सल आपरेशनों की जानकारी दी।

डीआरजी, कोबरा बटालियन और छत्तीसगढ़ पुलिस को सैल्यूट 
श्री शाह ने DRG, छत्तीसगढ़ पुलिस और कोबरा बटालियन के जवानों के अथक परिश्रम और साहस को सैल्यूट करते हुए कहा कि, इन जवानों ने विपरीत परिस्थितयों में भी नक्सलियों का डटकर मुकाबला किया और उन्हें घुटनों पर ला दिया। 

श्री शाह ने कहा कि, हथियार उठाने वाले किसी भी समूह को संविधान की अनदेखी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।  ये जो हथियारी मूवमेंट के लोग हैं, कहते हैं हमारे साथ अन्याय हो रहा है। अन्याय हो रहा है तो उसके लिए व्यवस्थाएं और अदालतें बनी हैं। लेकिन हथियार उठाओगे और संविधान को नहीं मानोगे, ऐसा नहीं चलेगा। जो भी ऐसा करेगा, उसका यही अंजाम होगा। 

शाह बोले- भूपेश बघेल को पूछो, प्रूफ दूं क्या...
जवाब देते हुए जब श्री शाह ने छततीसगढ़ में पांच साल कांग्रेस सरकार के दौरान सहयोग नहीं मिलने की बात कही तब विपक्षी सांसदों ने टोका, इस पर आक्रामक तेवर दिखाते हुए उन्होंने कहा कि, मुझे किसी व्यक्ति को सामने नहीं करना है। वरना भूपेश बघेल को पूछो प्रूफ दूं क्या यहां पर। हां बोलें तो बोलो, वरना फंस जाओगे।

2023 में छत्तीसगढ़ में सरकार बदली और दूसरे ही महीने वहां मैं गया था। बीजेपी की सरकार ने पूरे सहयोग का आश्वासन दिया, तब 24 अगस्त 2024 को हमने यह ऐलान किया कि, 31 मार्च 2026 को हम नक्सलवाद पूरी तरह से समाप्त कर देंगे. अमित शाह ने 2014 के बाद उठाए गए कदम गिनाए और कहा कि कम्युनिकेशन की सारी व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त कर दी गई। 

विकास की कमी नहीं, एक सियासी-वैचारिक आइडियोलॉजी था कारण
उन्होंने आगे कहा कि, पिछले 70 वर्षों में 60 साल कांग्रेस की सरकार रही, फिर भी वहां विकास नहीं पहुंचा। अगर कांग्रेस शासन में विकास नहीं हुआ तो आज दूसरों से हिसाब मांगना उचित नहीं है। वर्षों तक करोड़ों लोग गरीबी में रहे, कई युवा मारे गए, कई दिव्यांग बने, लेकिन विकास वहां नहीं पहुंचा। इस पूरे संघर्ष का जिम्मेदार कौन है, यह विचार करने की आवश्यकता है।

नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी नहीं बल्कि एक राजनीतिक और वैचारिक आइडियोलॉजी है, जिसे इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान स्वीकार कर लिया। नक्सल प्रभावित रेड कॉरिडोर में शामिल 12 राज्यों और आदिवासियों की समस्याओं को संसद में उजागर करने का मौका अब उन्हें मिला है। वे वर्षों से चाहते थे कि यह मुद्दा संसद में और दुनिया के सामने आए। 

हथियार उठाकर शासन के खिलाफ जाने वालों नहीं किया जाएगा बर्दास्त 
केंद्रीय गृहमंत्री श्री शाह ने आगे कहा कि, बस्तर में विकास न पहुँच पाने के कारण वहां के युवाओं को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर के आदिवासी क्षेत्र की जमीन और संसाधनों तक विकास के लाभ नहीं पहुंच पाए। आज भी बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य चल रहे हैं और सरकार इसका पूरा ध्यान रख रही है।

हथियार उठाकर शासन के खिलाफ जाने वालों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आदिवासियों और स्थानीय लोगों से अपील की कि वे संविधान और लोकतंत्र की प्रक्रिया के माध्यम से ही अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढ़ें। विकास और सुरक्षा दोनों को संतुलित करना आवश्यक है। 

गरीब और पिछड़े वर्गों के जीवन स्तर में सुधार के लिए उठाए गए कदम 
उन्होंने आगे कहा कि, सरकार ने बस्तर में विशेष योजनाओं के माध्यम से गरीब और पिछड़े वर्गों के जीवन स्तर में सुधार के लिए कदम उठाए हैं। नक्सलवाद की जड़ में सामाजिक और आर्थिक असमानताएं नहीं बल्कि वैचारिक आंदोलन है, जो हिंसा के माध्यम से अपनी मांगें मनवाने का प्रयास करता है।

सरकार का उद्देश्य न केवल हिंसा को रोकना है बल्कि विकास के माध्यम से क्षेत्र को स्थायी रूप से मजबूत बनाना भी है। विकास योजनाओं का लाभ सीधे आदिवासियों तक पहुंचाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की मुख्य योजनाएं शामिल हैं। 

इलाके को सुरक्षा बलों और प्रशासन द्वारा किया जा रहा नियंत्रित 
केंद्रीय गृहमंत्री श्री शाह ने आगे कहा कि, क्षेत्र में सुरक्षा बलों और प्रशासन की गतिविधियों के माध्यम से हिंसा को नियंत्रित किया जा रहा है और साथ ही विकास कार्यों में तेजी लाई जा रही है। विकास और सुरक्षा में सामंजस्य बनाकर बस्तर को पहले से अधिक समृद्ध और सुरक्षित बनाया जाएगा। बस्तर के लोग वर्षों से उपेक्षा और हिंसा का सामना कर रहे थे, लेकिन अब सरकार ने उनके कल्याण के लिए ठोस कदम उठाए हैं।