अटल आरोग्य लैब और व्यापक स्वास्थ्य अभियानों से बस्तर में लाखों लोगों तक मुफ्त, आधुनिक और समयबद्ध जांच सुविधाएं पहुंचाकर स्वास्थ्य क्रांति की नई शुरुआत।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। अटल आरोग्य लैब, स्क्रीनिंग अभियान और स्वास्थ्य ढांचे के सुदृढ़ीकरण के चलते अब लाखों लोगों को निःशुल्क और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं मिलने लगी हैं। यह परिवर्तन बस्तर में विकास और विश्वास के नए दौर की शुरुआत भी साबित हो रहा है।

आधुनिक और निःशुल्क जांच का नया मॉडल
अप्रैल 2026 में शुरू हुई “अटल आरोग्य लैब” योजना बस्तर सहित पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य प्रबंधन को पूरी तरह बदल रही है। इस पहल के तहत प्रदेश के 1046 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में अत्याधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ब्लड टेस्ट, शुगर, थायरॉयड, किडनी और लिवर फंक्शन सहित कुल 133 जांचें पूरी तरह निःशुल्क कराई जा रही हैं। साथ ही SMS और WhatsApp के माध्यम से रिपोर्ट घर बैठे मिलने की सुविधा ने ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को पहले से कहीं अधिक सहज और पारदर्शी बनाया है। पहले जिन जांचों के लिए लोगों को शहरों का रुख करना पड़ता था, अब वही सुविधाएं उनके सबसे नजदीकी केंद्र में ही उपलब्ध हैं।

बस्तर का सबसे बड़ा स्क्रीनिंग अभियान
बस्तर संभाग के 2,527 गांवों में 16.77 लाख लोगों की जांच का लक्ष्य लेकर एक व्यापक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए 2,235 से अधिक टीमें गठित की गई हैं, जो सीधे गांवों में जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। इस अभियान का मकसद केवल बीमारी का पता लगाना नहीं, बल्कि हर नागरिक की स्वास्थ्य स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना, प्रारंभिक पहचान करना और तुरंत उपचार सुनिश्चित करना है। यही वजह है कि बस्तर में मलेरिया के मामलों में 2015 की तुलना में 72% तक कमी दर्ज की गई है और पॉजिटिविटी रेट 4.6% से घटकर 0.46% तक आ गया है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बढ़ी स्वास्थ्य सेवा की पहुंच
पहले सुरक्षा कारणों से स्वास्थ्य सेवाएं जिन इलाकों तक नहीं पहुंच पाती थीं, वहां अब विशेष चिकित्सा शिविर लगाए जा रहे हैं। दिसंबर 2025 में आयोजित शिविरों में 1300 से अधिक ग्रामीणों की जांच की गई और दवाइयां वितरित की गईं। मलेरिया, टीबी, एनीमिया और आंखों की बीमारियों की जांच के साथ जरूरतमंदों को आयुष्मान कार्ड भी प्रदान किए गए। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि उन्हें अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का है।

मजबूत होता स्वास्थ्य ढांचा
जनवरी 2024 से जून 2025 तक बस्तर क्षेत्र के 130 से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) प्रमाणन प्राप्त हुआ है। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी दूर करने के लिए 450 से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत 36,000 से अधिक नए कार्ड जारी किए गए हैं और गरीब परिवारों को 8.22 करोड़ रुपये की सहायता मिली है। यह दिखाता है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सिर्फ सुलभ ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए भी दृढ़ है।

विकास और विश्वास का नया बस्तर
वर्ष 2026 तक बस्तर का लगभग 96% हिस्सा नक्सल प्रभाव से मुक्त हो चुका है। सुरक्षा बेहतर होने के साथ विकास कार्यों में तेजी आई है, जिसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत सुविधाएं गांव-गांव पहुंच रही हैं। सरकार द्वारा सुरक्षा कैंपों को भविष्य में अस्पताल और स्कूलों में बदलने की योजना बस्तर की स्थायी विकास दिशा को और मजबूत बनाती है।

सुकमा में 308 करोड़ की सौगात और स्वास्थ्य सेवा का विस्तार
13 अप्रैल को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुकमा में 228 विकास कार्यों की सौगात दी, जिसमें 159 कार्यों का शिलान्यास और 69 का लोकार्पण शामिल है। मिनी स्टेडियम सुकमा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने खुद स्वास्थ्य परीक्षण कर “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” की सराहना की। इस अभियान के तहत 7 जिलों में 1100 टीमें घर-घर जाकर लोगों की स्वास्थ्य जांच करेंगी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने टीबी मुक्त पंचायतों को प्रमाण पत्र बांटे, मरीजों को फूड बास्केट और चश्मे वितरित किए तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का संदेश दिया।

अटल आरोग्य लैब का राज्यस्तरीय शुभारंभ
मुख्यमंत्री ने सुकमा जिला अस्पताल में अटल आरोग्य लैब का राज्यस्तरीय शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश के हर नागरिक को किफायती, आधुनिक और सुलभ डायग्नोस्टिक सुविधा मिलेगी। अत्याधुनिक लैब के जुड़ने से सुकमा जिला अस्पताल में पहले से मौजूद ब्लड बैंक, सोनोग्राफी, एक्स-रे, ईसीजी, आपातकालीन सेवाओं और डायलिसिस को नई मजबूती मिली है।

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