अनिल सामंत- जगदलपुर। अमेरिका-इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध और ईरान द्वारा हार्मुज जलमार्ग बंद किए जाने के बाद विश्वभर में कच्चे तेल और एलपीजी आपूर्ति पर असर पड़ा है। इसी वैश्विक संकट का असर अब बस्तर में भी दिखने लगा है। शहर की विभिन्न गैस एजेंसियों में रसोई गैस की कमी की चर्चा तेज है और उपभोक्ताओं को सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
बुकिंग प्रक्रिया में मिस्ड कॉल और ओटीपी अनिवार्य होने के कारण भी उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस एजेंसी के नंबर पर मिस्ड कॉल देने के बाद भी कई दिनों तक ओटीपी नहीं आ रहा, जिससे बुकिंग नहीं हो पा रही।
शहर के कई रेस्टोरेंट बंद
इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाकर शहर में गैस सिलिंडर की कालाबाजारी भी तेजी से बढ़ रही है। सामान्यतः करीब 1100 रुपये में मिलने वाला रसोई गैस सिलेंडर इन दिनों 2 हजार से 3 हजार और कई जगह 4 हजार रुपये तक में अवैध रूप से बेचा जा रहा है। रसोई गैस सिलिंडर की कमी के चलते शहर तथा आसपास के अनेक होटल और रेस्टोरेंट में तालाबंदी की नौबत आ गई है।
नयापारा स्थित सोमापा रेस्टोरेंट, उससे लगा ओपल फ़ूड जंक्शन पिछले 4 दिनों से बंद है। न्यू नरेंद्र टाकीज के सामने फेमस बिरयानी रेस्टोरेंट 5 दिनों से बंद है। ओपल फ़ूड जंक्शन के संचालक संजीव पचौरी के अनुसार रसोई गैस सिलिंडर के किल्लत से होटल को बंद करना पड़ा। सोमापा के संचालक सुमित गुप्ता ने भी यही समस्या का हवाला दिया। सूत्रों के अनुसार घरेलू गैस सिलिंडर जो 900 में प्रति सिलिंडर मिलता है,वह अब 1900 से 2000 रुपये में कालाबाजारी में बिक रहा है। जबकि व्यवसायी गैस सिलिंडर जो 1900 का है, वह 4000 में दलाल बेच रहे हैं।
एजेंसी ने मानी सप्लाई की दिक्कत
हरिभूमि संवाददाता ने पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए शहर के विभिन्न रसोई गैस वितरकों और उपभोक्ताओं के बीच स्टिंग ऑपरेशन किया। एलपीजी वितरक से जब गैस की किल्लत और दलालों द्वारा सिलिंडर महंगे दामों में बेचने की जानकारी पर सवाल किया गया, तो उसने स्वीकार किया कि, जब तक रायपुर से नियमित परिवहन नहीं होगा, तब तक वितरक भी सीमित मात्रा में ही सिलिंडर उपलब्ध करा पाएंगे। वितरक ने यह भी बताया कि, मिस्ड कॉल बुकिंग के बाद ओटीपी की समस्या इसलिए आ रही है क्योंकि सिस्टम पर एक साथ अधिक दबाव है और सप्लाई कम होने के कारण वितरण प्रभावित हो रहा है।
दलाल बोला ओड़िशा से आता है सिलिंडर
दूसरे चरण के स्टिंग ऑपरेशन में हरिभूमि संवाददाता ग्राहक बनकर एक विवाह समारोह के दौरान गैस सिलिंडर की व्यवस्था के बारे में जानकारी लेने पहुंचा। आयोजन से जुड़े लोगों ने बताया कि बड़ी संख्या में मेहमानों के कारण रसोई गैस की आवश्यकता अधिक थी, इसलिए गैस एजेंसी से संपर्क किया गया। वहीं से एक दलाल का ठिकाना बताया गया।
जब संवाददाता ग्राहक बनकर उस दलाल के पास पहुंचा तो उसने प्रति सिलिंडर साढ़े तीन हजार से चार हजार रुपये तक में गैस उपलब्ध कराने की बात कही। दलाल ने दावा किया कि बस्तर से सटे ओड़िशा से सिलिंडर दुगनी कीमत पर मंगाए जाते हैं और फिर परिवहन का अतिरिक्त खर्च जोड़कर जगदलपुर तक पहुंचाया जाता है। उसके अनुसार इतना जोखिम उठाकर लाने के बाद मुनाफा न मिले तो यह काम संभव नहीं है।
जिला खाद्य विभाग का दावा - कालाबाजारी पर होगी कठोर कार्रवाई
बस्तर जिला खाद्य विभाग के जिला खाद्य नियंत्रक घनश्याम राठौर का कहना है कि जिले में कहीं भी रसोई गैस सिलिंडर की आधिकारिक कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति द्वारा रसोई गैस की कालाबाजारी की जाती है या उपभोक्ताओं से निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूली जाती है, तो उसके विरुद्ध खाद्य अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। विभाग ऐसी शिकायतों पर निगरानी रख रहा है और दोषी पाए जाने पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
गैस संकट में कैसे बढ़ रही कालाबाजारी
वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति प्रभावित होने और स्थानीय स्तर पर सप्लाई में देरी की स्थिति का फायदा उठाकर दलाल सक्रिय हो गए हैं। उपभोक्ताओं को एजेंसी से समय पर सिलिंडर नहीं मिलने, ओटीपी और बुकिंग की तकनीकी परेशानी तथा शादी-समारोह जैसे आयोजनों में अचानक अधिक गैस की जरूरत का फायदा उठाकर यह नेटवर्क सक्रिय हो रहा है। इसी कारण शहर में सामान्य कीमत वाले सिलिंडर कई गुना अधिक दरों पर बेचे जा रहे हैं,जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है।