बस्तर में सक्रिय अंतिम 42 नक्सलियों ने शुक्रवार को तेलगांना में समर्पण कर दिया। समर्पण करने वाले नक्सलियों पर एक करोड़ रुपए से अधिक का इनाम था। 

जगदलपुर। बस्तर में सक्रिय अंतिम 42 नक्सलियों ने शुक्रवार को तेलगांना में समर्पण कर दिया। समर्पण करने वाले नक्सलियों पर एक करोड़ रुपए से अधिक का इनाम था। समर्पण करने वाले बटालियन चीफ सोठी मल्ला समेत 42 नक्सलियों ने तेलगाना पुलिस को 8 सौ ग्राम सोने के बिस्किट, 5 एके 47 समेत 36 हथियार 44 मैगजीन व 1 हजार से अधिक जिंदा कारतूस भी सौंपा।

आईजी सुंदरराज पट्टलिंगम ने इस अतिंम सशस्त्र कैडरों के समर्पण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह समर्पण नक्सलमुक्त बस्तर व नक्सलमुक्त भारत के लिए अत्यंत प्रभावशाली है। प्रभावशाली है। इन कैडरों ने कई वर्षों तक भूमिगत रहते हुए माओवादी संगठन की सशस्त्र और हिंसक गतिविधियों में भाग लिया था। उनके द्वारा हथियारों सहित आत्मसमर्पण करना इस तथ्य को रेखांकित करता है कि हिंसा और सशस्त्र संघर्ष का मार्ग अब समाप्ति की ओर पहुंच चुका है।

समर्पण करने वाले नक्सलियों में यह शामिल
समर्पण करने वाले नक्सलियों में 25 लाख का इनामी सोढ़ी मल्ला उर्फ केशाल उर्फ निखिल के अलावा डीवीसीएम माड़वी मड्डा उर्फ रविन्दर, पुनेम सुक्कु, हेमला लच्छी उर्फ मासे उर्फ शीला के अलावा एसीएम सोडी भीमा उर्फ रजीत, ताती राजू, कवासी राजू उर्फ रमेश, मुड़यिम भीमा उर्फ रिंकू, मड़कम भीमे उर्फ सुनीता, पोडियम गंगी उर्फ सुदंरी, सोढ़ी भीमे उर्फ मालती, कुड़ेम देवी, मड़कम जोगी, पुनेम इते उर्फ पार्वती, पोडियम सुबरी उर्फ अंजली, मड़कम इदुम उर्फ नागेश, कुंजाम भीमा, माड़वी जोगा, कुंजाम सोनू उर्फ सवीन, पुनेम सोमू उर्फ राकेश के अलावा तेलगांन स्टेट कमेटी के चपा नारायणा उर्फ गजेंदर, कड़ती सन्नू उर्फ मथु, मोड़यिम मुन्नी, कुंजाम इंदुमल उर्फ महेन्दर, नुप्पो उंगा उर्फ सुनील, पोड़‌यिम लक्ष्मी, मुसाकी देवे डुड्डी सोमडू उर्फ शंकर, माड़वी सोमड़ी उर्फ लता, करटम उरें उर्फ रनीता, पुनेम रामे के अलावा दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के पुनेम मोटू उर्फ जगनु, डोडी इथु उर्फ किशोर, गोन्जे हिड़मे, कुंजाम लच्छू, पुनेम शांति, मड़कम बुधरा, कुंजाम भीमा, मड़कम उगें, रवा सन्ना उर्फ गुड्डु तथा अपका श्रीनू शामिल है।

अंतिम अवसर देते हुए सर्मपण की अपील
आईजीपी ने बस्तर क्षेत्र में शेष बचे कुछ गिने-चुने माओवादी कैडरों को अंतिम अवसर देते हुए अपील की कि वे बदलती परिस्थितियों को समझते हुए हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में लौटें। पुनर्वास, सुरक्षा और सम्मानजनक पुनस्थापन का मार्ग खुला है, जबकि सुरक्षा बल क्षेत्र में शांति और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं। आईजी ने स्पष्ट सदेश देते हुए कहा कि उग्रवाद का दौर समाप्ति की ओर है और भविष्य शांति, विकास तथा स्थानीय समुदायों की आकांक्षाओं का है।

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