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रायपुर। खराब रिजल्ट ने एक और छात्रा की जान ले ली है। सोमवार की रात राजधानी रायपुर में 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली। यह घटना विधानसभा थाना क्षेत्र के ग्राम सकरी की है। 17 साल की वसुंधरा बारले ने अपने कमरे फांसी लगाकर जान दे दी।

मिली जानकारी के मुताबिक, वसुंधरा बारले एक मेधावी छात्रा थी। हाल ही में उसका 12वीं का रिजल्ट आया है। उसे महज 63% नंबर ही मिले। हालांकि उसे उम्मीद इससे ज्यादा नंबर पाकर मेरिट में आने की थी। इसी बात को लेकर वह उदास चल रही थी। पुलिस के अनुसार, घटना रात के समय की है, जब वसुंधरा ने अपने कमरे में जाकर फांसी लगाई। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार वालों में हड़कंप मच गया और उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी है।

बता दें कि, विधानसभा पुलिस इस मामने की सभी एंगल से जांच कर रही है। वसुंधरा की आत्महत्या ने न केवल उसके परिवार बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना एक चेतावनी है कि हमें अपने बच्चों की मानसिक सेहत पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है और उन्हें यह अहसास कराने की जरूरत है कि, जीवन में अंकों से बढ़कर और भी बहुत कुछ है। वसुंधरा की मौत एक दुखद घटना है, और हम सबको मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसा फिर कभी न हो।
 

परिवार का हाल

वसुंधरा के परिवार में उसकी इस आत्महत्या से मातम छा गया है। उसके माता-पिता और अन्य रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है। माता-पिता ने बताया कि वसुंधरा बहुत ही शांत और समझदार बच्ची थी और हमेशा अपने भविष्य के लिए गंभीर रहती थी। लेकिन यह कभी नहीं सोचा था कि पढ़ाई का दबाव उसकी जान ले लेगा।

समाज और शिक्षा प्रणाली पर सवाल

यह घटना समाज और शिक्षा प्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। बच्चों पर अत्यधिक पढ़ाई और परिणाम का दबाव डालना किस हद तक सही है? क्या हम अपने बच्चों को केवल अंक और टॉप करने की होड़ में मानसिक तनाव और दबाव में धकेल रहे हैं? यह सोचने का समय है कि हमें अपने बच्चों को किस तरह से सपोर्ट करना चाहिए ताकि वे मानसिक रूप से स्वस्थ और खुशहाल रह सकें। 

पुलिस की कार्रवाई

विधानसभा थाने की पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि वे वसुंधरा के दोस्तों और शिक्षकों से भी बातचीत करेंगे ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और कोई कारण तो नहीं था जिसने उसे ऐसा कदम उठाने पर मजबूर किया।