पुलिस वालों की छवि आम लोगों की नजर में बहुत अच्छी नहीं है, लेकिन कोई पूरी जिंदगी नक्सली इलाके में ही काट दे, वह भी बेदाग तो बड़ी बात है। 

राजेश दास- जगदलपुर। पुलिस वालों की छवि आम लोगों की नजर में बहुत अच्छी नहीं है, लेकिन कोई पूरी जिंदगी नक्सली इलाके में ही काट दे, वह भी बेदाग तो बड़ी बात है। ऐसे ही एक पुलिस वाले को बुधराम कोमरे को 40 साल की सेवा के बाद विदाई दी गई। उनकी इतनी ही उपलब्धि नहीं रही। वे सिपाही के रूप में भर्ती हुए और एसआई के रूप में सेवानिवृत्त। उन्हें सेवाकाल में 15 बार नगद इनाम मिला और 55 बार प्रशंसा पत्र। वे कई मुठभेड़ का हिस्सा रहे और शहादत के भाव लिए डटे रहे। 

बस्तर में नक्सलवाद की प्रारम्भ से अंत तक बस्तर पुलिस के कर्मठ अधिकारी उप निरीक्षक बुधराम कोमरे ने 40 वर्षों की सेवा के बाद देश के नक्सलमुक्त तिथि 31 मार्च को सेवानिवृत्ति ली। चार दशक के सर्विस के दौरान उन्हें उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 15 नगद पुरस्कार व 55 प्रशंसापत्रों से सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान उन्हें कड़ी मेहनत और अनुशासन, समर्पण व निष्ठा के साथ कर्तव्यों का निर्वहन करने के कारण मिला। कांकेर के छोटे से आमाकड़ा गांव के मेसोराम कोमरे के सुपुत्र बुधराम कोमरे ने 12 अप्रैल 1986 को जिला पुलिस बल में बतौर आरक्षक के पद से अपने करियर की शुरूआत की थी। वे कहते हैं कि इतना सम्मान और पुरस्कार प्राप्त करना आसान नहीं था। विभाग में रहने के दौरान कई नक्सली मुठभेड़ में शामिल रहे थे। 1998 में कई नक्सलियों को पकड़ने में सफलता मिली थी। इनमें संघम सदस्य व एरिया कमाण्डर भी शामिल थे। 

बुधराम कोमरे ने विभाग में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई : एसपी
इसी वर्ष पामेड़ थाना प्रभारी पतिराम नेताम की साप्ताहिक बाजार ड्यूटी के दौरान नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। हत्या के मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए दिन रात भारी बारिश के बावजूद जब नक्सली अपने गांव पहुंचा था, तब उसे गिरफ्तार करने में सफल रहे थे। इसके अलावा सर्चिग व गश्त में अच्छा कार्य करने, सफलतापूर्वक वीआईपी ड्यूटी, स्थायी वारंटी नक्सलियों की गिरफ्तारी आदि मामलों में उन्हें नगद पुरस्कार व प्रशंसापत्रों से सम्मानित किया जा चुका है। सेवानिवृति पर विदाई समारोह में एसपी शलभ कुमार सिन्हा, एएसपी माहेश्वर नाग, डीएसपी ट्रैफिक संतोष जैन, आरआई अभिजीत सिंह भदौरिया एवं अन्य अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे थे। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। एसपी ने कहा कि बुधराम कोमरे ने विभाग में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है। उनकी सेवानिवृत्ति पर बस्तर पुलिस परिवार उन्हें बेहतर स्वास्थ्य और सुखद भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करता है।

24 साल नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में
बुधराम कोमरे निरंतर पदोन्नत होते हुए प्रधान आरक्षक (1998), सहायक उप निरीक्षक (2007) और अंततः 2014 में उप निरीक्षक बने। अपने 39 वर्ष, 11 माह और 19 दिनों के लंबे कार्यकाल के दौरान उनका रिकॉर्ड अत्यंत प्रभावशाली रहा है। अनुशासन के चलते पूरे सेवाकाल में उन्हें कोई भी सजा नहीं मिली जो उनके उच्च अनुशासनात्मक स्तर को दशार्ता है। बस्तर और दंतेवाड़ा जैसे चुनौतीपूर्ण जिलों के विभिन्न थानों में अपनी सेवाएँ दीं। जिला दंतेवाड़ा में सर्वाधिक समय (1994-2018) तक पदस्थ रहे। अपने अंतिम कार्यकाल में उन्होंने थाना लोहण्डीगुड़ा में कुशलतापूर्वक दायित्वों का निर्वहन किया।

मरेंगे तो शहीदों में होगी गिनती
दंतेवाड़ा में पोस्टिंग के समय नक्सलवाद चरम पर था। उनके सामने दो रास्ते थे या तो नौकरी छोड़ दे या देश के लिए शहीद हो जाए। तब नौकरी छोड़ने की बजाए उन्हें देश के लिए शहीद होना मंजूर था।

वर्तमान सात जिले तब एक ही जिला था
बुधराम कोमरे ने बताया कि उसने 22 साल की उम्र में पुलिस विभाग में ज्वाइन किया और उनकी पहली पोस्टिंग नारायणपुर थाना में हुई तब पूरा बस्तर एक ही जिला हुआ करता था। और बस्तर कलेक्टर ही वर्तमान सातों जिले को चलाया करते थे। इसके बाद 5 वर्ष धूर नक्सल प्रभावित ओरछा चौकी में रहे। तब नक्सल गतिविधियां धीरे धीरे बढ़ रही थी। इसके बाद जिला मुख्यालय में खुले दूसरे नए थाना बोधघाट में पोस्टिंग हुई। इसके उपरांत 1989 में दंतेवाड़ा जिला बना। जिला बनने के बाद बल की भर्ती नहीं हुई थी तब बस्तर से 250 कर्मचारियों को दंतेवाड़ा भेजा गया। बस्तर से भेजे गए बलों को बीजापुर, सुकमा व दंतेवाड़ा थाना के अलावा चिंतलनार, भेज्जी, चिंतागुफा, पामेड़ भांसी आदि जगहों में पोस्टिंग की गई।

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