बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन की खबरों ने राज्य में सत्ता संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
हाल ही में हुए चुनावों में एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिला था, जिसमें भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड ने मिलकर सरकार बनाई थी। चुनाव के दौरान ‘2025-30 फिर नीतीश’ का नारा दिया गया था, लेकिन अब मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने की चर्चा ने राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।
इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की भूमिका बन रही है? क्या भाजपा अब अपने मुख्यमंत्री के साथ सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी या जदयू ही नेतृत्व बनाए रखेगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है-
क्या नीतीश कुमार खुद राज्यसभा जाना चाहते हैं या उन्हें राष्ट्रीय राजनीति की ओर भेजा जा रहा है?
इन्हीं सवालों पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ विशेष “चर्चा” में राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं और वरिष्ठ पत्रकार ने खुलकर अपनी राय रखी।
- राहुल आनंद – प्रवक्ता, भाजपा
- सुरेंद्र सिंह – प्रवक्ता, जेडीयू
- डॉ. राकेश रंजन – राजद प्रतिनिधि
- प्रेम कुमार – वरिष्ठ पत्रकार
राज्यसभा की राह पर नीतीश कुमार | बिहार की सत्ता किसके हाथ?
किसने क्या कहा?









