Motihari Liquor Tragedy: बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले में जहरीली शराब ने एक बार फिर कोहराम मचा दिया है। शनिवार को इलियास अंसारी नामक व्यक्ति की मौत के बाद इस कांड में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है। इलियास को गंभीर हालत में पटना रेफर किया गया था, लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इसके अलावा जयसिंहपुर, परसौना और बालगंगा जैसे इलाकों के कई लोग इस 'जहर' की भेंट चढ़ चुके हैं।
मैथनॉल बना जानलेवा जहर
इस शराबकांड की फॉरेंसिक जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि शराब के नाम पर लोगों को शुद्ध मैथनॉल परोसा गया था। मैथनॉल एक औद्योगिक केमिकल है, जिसका सेवन शरीर के लिए घातक होता है। तस्करों ने अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में स्प्रिट और मैथनॉल का जानलेवा मिश्रण तैयार किया था, जो सीधे लीवर और नर्वस सिस्टम पर हमला करता है।
आंखों की रोशनी खो चुके हैं कई लोग
शराबकांड का असर इतना भयानक है कि विभिन्न अस्पतालों में भर्ती 15 से ज्यादा मरीजों में से आधे अपनी आंखों की रोशनी खो चुके हैं। मोतिहारी सदर अस्पताल और पटना के पीएमसीएच (PMCH) में जिंदगी की जंग लड़ रहे मरीजों की हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि मैथनॉल शरीर में जाते ही जहर में बदल जाता है, जिससे अंधापन और अंगों का फेल होना आम बात है।
700 लीटर स्प्रिट जब्त, टला बड़ा हादसा
घटना के बाद पुलिस प्रशासन एक्शन मोड में है। पिपराकोठी इलाके से पुलिस ने छापेमारी कर 700 लीटर स्प्रिट बरामद की है। एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि अगर समय रहते यह खेप जब्त नहीं होती, तो हजारों लोगों की जान जा सकती थी। पुलिस ने इसे एक संभावित 'नरसंहार' करार दिया है। बरामद स्प्रिट के सैंपल में भी शुद्ध मैथनॉल होने की पुष्टि हुई है।
मुख्य माफिया और तस्कर गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में नकेल कसते हुए मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। शराब माफिया नागा राय, राजा और जम्मू बैठा अब पुलिस की गिरफ्त में हैं। पूछताछ में पता चला है कि इन तस्करों ने परसौना और बालगंगा क्षेत्र में जहरीली शराब की सप्लाई की थी। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जिससे यह पता चल सके कि इतनी बड़ी मात्रा में मैथनॉल इन तस्करों तक कैसे पहुंचा।
क्यों घातक है स्प्रिट और मैथनॉल?
स्प्रिट का इस्तेमाल आमतौर पर घाव साफ करने या सैनिटाइजर बनाने में होता है, जबकि मैथनॉल का उपयोग ईंधन और औद्योगिक कामों में किया जाता है। शराब तस्कर इसकी गंध और स्वाद का फायदा उठाकर इसे कच्ची शराब में मिला देते हैं। शरीर में पहुंचते ही यह लीवर को नष्ट कर देता है और खून में मिलकर इंसान को मौत की नींद सुला देता है।