Bihar Budget 2026-27: बिहार सरकार द्वारा हाल ही में विधानमंडल में पेश किए गए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट ने सबको चौंका दिया है। रोजगार और सरकारी नौकरियों को प्राथमिकता देने के कारण राज्य सरकार के वेतन बजट का आकार अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। सरकार ने घोषणा की है कि अगले वित्तीय वर्ष में अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन पर कुल 70,220 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि महज 20 साल पहले, यानी 2005-06 में यह खर्च सिर्फ 5,152 करोड़ रुपये हुआ करता था।
पेंशन का बोझ भी हुआ दोगुना
वेतन के साथ-साथ सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन पर होने वाला खर्च भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। वर्तमान बजट में पेंशन मद के लिए 35,170 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो कुल वेतन राशि का लगभग आधा है। वर्ष 2005-06 में पेंशन पर केवल 2,456 करोड़ रुपये खर्च होते थे।
पिछले कुछ वर्षों में जिस रफ्तार से नई नियुक्तियां हुई हैं, उससे भविष्य में पेंशन का यह आंकड़ा और भी तेजी से बढ़ने की संभावना है।
कर्मचारियों की संख्या में तीन गुना इजाफा
वेतन बजट में इस बेतहाशा बढ़ोतरी की मुख्य वजह सरकारी विभागों में बड़े पैमाने पर हो रही भर्तियां हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और पुलिस जैसे महत्वपूर्ण विभागों में पिछले दो वर्षों के भीतर ही 2 लाख से अधिक पदों पर बहाली की गई है।
आंकड़ों के अनुसार, 20 साल पहले राज्य में सरकारी कर्मियों की संख्या लगभग 3.50 लाख थी, जो अब बढ़कर करीब 9.50 लाख हो गई है। कर्मचारियों की संख्या में आई यह तीन गुना वृद्धि सीधे तौर पर बजट के बढ़ते आकार को दर्शाती है।
2030 तक बढ़ेगा वित्तीय दबाव
नीतीश सरकार ने अगले 5 वर्षों में 10 लाख सरकारी नौकरियां और 1 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में जिस तरह से दनादन नियुक्तियां की जा रही हैं, उसे देखते हुए आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक वेतन और पेंशन का खर्च कई गुना और बढ़ जाएगा।
हालांकि यह युवाओं के लिए सुखद है, लेकिन सीमित राजस्व वाले राज्य बिहार के लिए बढ़ता वेतन बिल एक बड़ा वित्तीय प्रबंधन का विषय बन गया है।










