Bihar Politics: बिहार की सियासत में पल-पल समीकरण बदल रहे हैं। शुक्रवार शाम दिल्ली में होने वाली बीजेपी कोर कमेटी की अहम बैठक अचानक टल गई है। यह बैठक बीजेपी के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े के आवास पर होनी थी, जिसमें राज्य के कैबिनेट विस्तार और नेतृत्व परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा होनी थी। आखिरी वक्त पर बैठक रद्द होने से राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है।
दिल्ली दौरा बीच में छोड़ पटना लौटे दिग्गज नेता
बीजेपी की बैठक टलने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपना दिल्ली दौरा बीच में ही खत्म कर दिया और पटना के लिए रवाना हो गए। दोनों बड़े नेताओं का अचानक पटना लौटना कई तरह के राजनीतिक संकेत दे रहा है। माना जा रहा है कि सत्ता के नए समीकरणों को अंतिम रूप देने के लिए अब पटना में ही मंथन किया जाएगा।
14 अप्रैल को आ सकता है नीतीश कुमार का इस्तीफा
नीतीश कुमार ने राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने के बाद दिल्ली में संकेत दिया था कि वे अगले 3-4 दिनों में अपनी जिम्मेदारी नए हाथों में सौंप सकते हैं। ऐसे में प्रबल संभावना जताई जा रही है कि 14 अप्रैल को नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसी दिन खरमास भी समाप्त हो रहा है, जिसे शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए उपयुक्त माना जाता है।
बीजेपी के नेतृत्व में नई सरकार की तैयारी
बिहार की राजनीति में पहली बार ऐसा होने जा रहा है जब बीजेपी पूरी तरह से राज्य की कमान अपने हाथों में ले सकती है। चर्चा है कि नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनाएगी। मुख्यमंत्री पद की रेस में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। उनके अलावा केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, संजय जायसवाल और मंगल पांडे के नामों को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं।
विपक्ष अलर्ट, 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण
नीतीश और सम्राट के पटना लौटते ही विपक्षी दल आरजेडी (RJD) और कांग्रेस भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए हैं। राजभवन और सचिवालय के आसपास प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले 24 से 48 घंटे बिहार की भविष्य की राजनीति तय करेंगे। फिलहाल सभी की नजरें मुख्यमंत्री आवास '1 अणे मार्ग' पर टिकी हुई हैं, जहां बैठकों का दौर शुरू होने वाला है।
नई व्यवस्था की ओर बढ़ता बिहार
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और राज्य में बीजेपी नेतृत्व की सरकार बनने की चर्चाओं ने बिहार की राजनीति को एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा कर दिया है। 15 अप्रैल के आसपास नई सरकार का गठन होने की संभावना है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी किसे बिहार की बागडोर सौंपती है और नीतीश कुमार की दिल्ली में क्या भूमिका रहती है।