बिहटा-औरंगाबाद रेल परियोजना को लेकर बड़ी खबर है। तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अब एक साल के अंदर भूमि अधिग्रहण का काम खत्म कर लिया जाएगा। हैदराबाद की कंपनी जल्द शुरू करेगी सर्वे।

Bihta-Aurangabad Rail Line: बिहटा-औरंगाबाद रेल लाइन परियोजना को लेकर एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट की सभी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अब अगले एक साल के भीतर भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना के शुरू होने से पटना, अरवल और औरंगाबाद जिले के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

अधिकारियों और संघर्ष समिति के बीच हुई वार्ता
परियोजना की वर्तमान स्थिति और प्रगति रिपोर्ट जानने के लिए बिहटा-औरंगाबाद रेल परियोजना संघर्ष समिति के केंद्रीय संयोजक अजय कुमार ने महेंद्रू (पटना) स्थित पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य अभियंता अनिल कुमार से मुलाकात की।

इस बैठक में परियोजना को गति देने पर चर्चा हुई। मुख्य अभियंता ने स्पष्ट किया कि नई रेल लाइन बिछाने के लिए आवश्यक शुरुआती कागजी और तकनीकी औपचारिकताएं अब पूरी हो चुकी हैं।

हैदराबाद की कंपनी करेगी भूमि का सर्वे
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए हैदराबाद की कंपनी 'एसए इंफ्रा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड' को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह कंपनी जल्द ही जिला भू-अर्जन पदाधिकारियों के साथ मिलकर जमीन की पैमाइश और अधिग्रहण का काम शुरू करेगी। लक्ष्य रखा गया है कि औरंगाबाद से बिहटा तक की पूरी जमीन का अधिग्रहण एक साल के भीतर कर लिया जाए, ताकि निर्माण कार्य में कोई बाधा न आए।

संघर्ष समिति ने दी आंदोलन की चेतावनी
समिति के संयोजक अजय कुमार ने मुख्य अभियंता को दोटूक शब्दों में कहा कि यदि तय समय सीमा के भीतर भूमि अधिग्रहण नहीं हुआ, तो संघर्ष समिति शांत नहीं बैठेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि इस बार बिहटा ट्रैक के साथ-साथ अनुग्रह नारायण रोड को भी जाम किया जाएगा। समिति ने स्पष्ट किया कि देरी होने की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी रेलवे के निर्माण संगठन, संबंधित जिलाधिकारियों और भू-अर्जन पदाधिकारियों की होगी।

अरवल और औरंगाबाद के लिए लाइफलाइन
यह रेल परियोजना अरवल और औरंगाबाद जिले के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं है। लंबे समय से इस इलाके के लोग रेल संपर्क की मांग कर रहे हैं। अजय कुमार ने "जय रेलवे-तय रेलवे" का नारा देते हुए कहा कि अब इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने का समय आ गया है। इस नई रेल लाइन के जुड़ने से पटना से औरंगाबाद की दूरी कम होगी और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।