भागलपुर की अदालत ने 20 साल पुराने दुष्कर्म मामले में मोहम्मद रिजवान को 10 साल की कठोर सजा सुनाई है। दोषी ने 2005 में 10 वर्षीय बच्ची के साथ हैवानियत की थी।

Bhagalpur News: बिहार के भागलपुर में न्याय की एक बड़ी जीत हुई है। करीब 20 साल पुराने एक जघन्य अपराध के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी मोहम्मद रिजवान को कड़ी सजा सुनाई है। नाथनगर थाना क्षेत्र में साल 2005 में एक 10 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में अब जाकर इंसाफ मिला है।

अदालत ने सुनाई 10 साल की कठोर सजा
भागलपुर के प्रथम जिला सत्र न्यायाधीश मिलन कुमार की अदालत ने मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए मोहम्मद रिजवान को दोषी करार दिया और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

जुर्माने की राशि जमा न करने की स्थिति में रिजवान को 5 महीने की अतिरिक्त साधारण सजा काटनी होगी। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक श्री किशोर यादव ने इस केस की पैरवी की और अदालत के सामने पुख्ता सबूत पेश किए।

10 रुपये का लालच देकर खेत में ले गया था दरिंदा
यह दर्दनाक घटना 17 सितंबर 2005 की है। नाथनगर क्षेत्र में अपने घर के बाहर चबूतरे पर खेल रही एक 10 साल की बच्ची को मोहम्मद रिजवान ने अपना निशाना बनाया था। आरोपी ने बच्ची को 10 रुपये देने का झांसा दिया और उसे गोद में उठाकर पास के एक खेत में ले गया, जहां उसने मासूम के साथ हैवानियत को अंजाम दिया। वारदात के बाद आरोपी ने बच्ची को डराया-धमकाया कि वह इस बारे में अपने माता-पिता या नानी को कुछ न बताए और उसे मदरसा के पास छोड़कर फरार हो गया।

चिकित्सकीय जांच में हुई थी पुष्टि
डर के कारण बच्ची ने शुरुआत में किसी को कुछ नहीं बताया, लेकिन जब उसके शरीर में असहनीय दर्द होने लगा, तब परिजनों को शक हुआ। परिवार के लोग उसे डॉक्टर के पास ले गए, जहां मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। इसके बाद परिजनों ने हिम्मत दिखाते हुए नाथनगर थाने में मोहम्मद रिजवान के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और चार्जशीट दाखिल की।

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्याय की जीत
दो दशक तक चले इस मामले में अभियोजन पक्ष ने हार नहीं मानी। सभी प्रमुख गवाहों की गवाही और साक्ष्यों को अदालत के समक्ष मजबूती से रखा गया। 20 साल के लंबे इंतजार के बाद जब अदालत ने फैसला सुनाया, तो पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने इसे न्याय की जीत बताया। लोगों का कहना है कि देर से ही सही, लेकिन दरिंदे को उसके किए की सजा मिल गई है, जिससे कानून पर आम जनता का भरोसा और मजबूत हुआ है।