चैत्र अमावस्या 2026: जानिए 19 मार्च को अमावस्या तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र और पितृ तर्पण व दान का महत्व। इस दिन कैसे करें पुण्यकारी अनुष्ठान और दान की पूरी जानकारी।  

Chaitra Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या का दिन अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। हर माह में आने वाली अमावस्या का अपना विशेष महत्व होता है, और चैत्र माह की अमावस्या को विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। इस वर्ष, चैत्र अमावस्या 19 मार्च 2026 को पड़ रही है। इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान और दान करने से धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं। इसे पितृ तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कार्यों के लिए भी श्रेष्ठ दिन माना जाता है। ऐसा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

अमावस्या के दिन दान का महत्व
चैत्र अमावस्या के दिन दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह न केवल धन-धान्य में वृद्धि लाता है बल्कि पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में भी सहायक होता है।

दान शुभ मुहूर्त

  • सुबह 5:08 बजे से 5:56 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:22 बजे से 1:11 बजे तक

अमावस्या के दिन क्या करें दान 

  • काले तिल- इसे दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं।
  • अन्न- गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न का दान अत्यंत शुभ है।
  • वस्त्र- जरूरतमंदों को कपड़े देने से पुण्य बढ़ता है।
  • सफेद वस्तुएं- सफेद रंग की चीजें दान करना भी लाभकारी माना गया है।
  • दान करते समय ध्यान दें कि पितरों का तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।

अमावस्या के दिन क्या करें?

  • पीपल के नीचे दीपक जलाना: पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ होता है।
  • घर की दक्षिण दिशा में दीया: घर की दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीया जलाएं।
  • जल में काले तिल का प्रयोग: जल में काले तिल मिलाकर पूर्वजों को अर्पित करें।
  • गंगा स्नान का विकल्प: यदि गंगा स्नान संभव न हो, तो घर पर नहाने वाले पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

चैत्र अमावस्या का दिन धार्मिक अनुष्ठान, दान और आत्मिक शांति के लिए उपयुक्त है। इस दिन की सकारात्मक ऊर्जा परिवारिक और सामाजिक जीवन में भी लाभकारी साबित होती है। पितृ तर्पण और दान से न केवल आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है, बल्कि मानसिक संतोष और घर में सुख-समृद्धि भी आती है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।