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धनी राष्ट्रों के कारण है WTO की नीतियों में मतभेद, भारत ने किया विरोध

डब्ल्यूटीओ विकासशील देश अपने कुल कृषि उत्पादन का दस प्रतिशत तक खाद्य सब्सिडी के रूप में दे सकते हैं।

धनी राष्ट्रों के कारण है WTO की नीतियों में मतभेद, भारत ने किया विरोध
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नई दिल्ली. भारत ने बुधवार को विश्व व्यापार संगठन में गतिरोध के लिए कुछ विकसित देशों के अनुचित रुख को जिम्मेदार ठहराया। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने भारत आर्थिक शिखर सम्मेलन की बैठक में कहा कि भारत व्यापार सुगमता करार के खिलाफ नहीं है, लेकिन वह चाहता है कि खाद्यान्न भंडारण संबंधी विवाद का समाधान निकाले जाने तक शांति के उपबंध को जीवित रखा जाए।

शांति उपबंध ऐसी सहमति है जिसके तहत विकसित देश भारत जैसे विकासशील देशों की खाद्य सब्सिडी के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में शिकायत नहीं कर सकते। जेटली ने कहा, ‘हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि भारत निश्चित रूप से व्यापार सुगमता करार के खिलाफ नहीं है। व्यापार सुगमता पर हम बहुस्तरीय व्यवस्था पर सहमत हैं, लेकिन खाद्यान्न भंडारण का विवाद निपटने तक ‘शांति के उपबंध’ को कायम रखा जाना चाहिए।’
डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुसार विकासशील देश अपने कुल कृषि उत्पादन का दस प्रतिशत तक खाद्य सब्सिडी के रूप में दे सकते हैं। कृपया विवाद का स्थायी सामाधान निकालने तक शांति के उपबंध को बरकार रखने की बात मान जाएं। वित्त मंत्री ने इसके साथ ही जोड़ा कि खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था की गणना 1986-87 के मूल्यों पर की जाती है, जो अनुचित नजर आता है।
जेटली ने कहा, शांति प्रावधान चार साल में समाप्त हो जाएगा। हमने सिर्फ इस विवाद के निपटान का आग्रह किया है और शांति प्रावधान इसके साथ-साथ रहना चाहिए। ऐसे में जब तक आप इस मुद्दे को नहीं सुलझाते हैं, भारत को विवाद निपटान व्यवस्था में नहीं घसीटा जाना चाहिए। शांति प्रावधान कायम रहना चाहिए। ऐसे में यह विवाद व्यापार सुगमता को लेकर नहीं है। कुछ देशों के अनुचित रुख की वजह से व्यापार सुगमता प्रभावित हो रही है।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, क्या कहा WTO ने -
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