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Union Budget 2019: मोदी सरकार 2.0 ने तोड़ी बजट परंपरा, जानें क्या है 'बही खाता'

आज संसद (Parliament) में मोदी सरकार (Modi Govt) के दूसरे कार्यकाल का पहला बही खाता (Bahi Khata) पेश होगा। इस बार मोदी सरकार ने बजट (Budget 2019) को लेकर कई साल पूरानी परंपराए तोड़ दी हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) मीडिया के सामने जैसे ही आईं तो उनके हाथ में बजट ब्रीफकेस नजर नहीं आया और बजट का नाम भी बदल दिया।

Union Budget 2019: मोदी सरकार 2.0 ने तोड़ी बजट परंपरा, जानें क्या है बही खाता
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Union Budget 2019 Modi Government 2.0 has broken budget tradition know what is book keeping

आज संसद (Parliament) में मोदी सरकार (Modi Govt) के दूसरे कार्यकाल का पहला बही खाता (Bahi Khata) पेश होगा। इस बार मोदी सरकार ने बजट (Budget 2019) को लेकर कई साल पूरानी परंपराए तोड़ दी हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) मीडिया के सामने जैसे ही आईं तो उनके हाथ में बजट ब्रीफकेस नजर नहीं आया और बजट का नाम भी बदल दिया।

बल्कि उनके हाथों में फाइल लाल कपड़े में लिपटी हुई नजर आईं। उस पर भारत सरकार का राष्ट्रीय चिन्ह् भी दिखा। इसके साथ ही मोदी सरकार ने बजट ब्रीफकेस की सालों पुरानी परंपरा को तोड़ दिया।

बजट पेश करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ही नहीं उनके साथ राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, वित्तीय सचिव एस सी गर्ग, मुख्य आर्थिक सलाहकार के सुब्रमण्यम समेत अन्य अधिकारी भी मंत्रालय से रवाना हुए। लेकिन इसी बीच मुख्य आर्थिक सलाहकार के सुब्रमण्यम ने घोषणा कर दी कि इस बार सरकार बजट नहीं बहीखाता पेश करेगी।

क्या है बहीखाता (What is Book Keeping)


इस बार मोदी सरकार टू प्वाइंट जीरो इतिहास बदलने में जुटी हुई है। पहले महिला वित्त मंत्री बनाना, फिर बजट ब्रीफकेस का नाम और अब बजट की जगह बहीखाता पेश करना। एक के बाद एक परंपरा को तोड़ा जा रहा है। सबसे पहले बता दें कि बहीखाते को अंग्रेजी में बुक-कीपिंग कहते हैं।

बुक कीपिंग का अर्थ है कि एक किताब के अंदर व्यवसाय का पूरा हिसाब किताब रखना। वैसे इसे पुस्तपालन भी कहा जाता है। साफ और सीधे शब्दों में लेन-देन को एक किताब में लिखा जाना। यह एक बहुत पूरानी परंपरा है। लेन-देन हजारों की संख्या में होता इसलिए उसका हिसाब किताब रखा जाता है।

व्यावसायिक लेन-देनो का स्थायी रूप से हिसाब किताब रखने को ही बही खाता कहा जाता है। वैसे वहीं खाता कम्पनी, गैर–लाभकारी संगठन या किसी व्यक्ति के वित्तीय लेनदेन के आंकड़ों का हिसाब रखता है। इसी में वित्तीय लेनदेन को रिकॉर्ड रखा जाता है। एक रिकॉर्ड के मुताबिक, भारत में बही खाता का प्रचलन दशकों पुराना है।

कहते हैं कि भारतीय व्यवसायी अपना बही खाता इटली लेकर गए थे। जिसके बाद यह प्रणाली पूरे यूरोप में धीरे धीरे फैल गई। लेकिन आज कल डिजिटल की दुनिया में अब भी कई लोग इसी परंपरा के मुताबिक चलते हैं। लेकिन इसको लेकर मोदी सरकार ने बजट को बहीखाते का नाम दिया है।

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