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Udham singh Jayanti : उधम सिंह ने अपना नाम बदलकर क्यों राम मोहम्मद सिंह आजाद रख लिया था

Udham singh Jayanti : उधम सिंह जी की आज जयंती है। उधम सिंह ने जलियावाला हत्याकांड के दोषी जनरल माइकल ओ डायर को लंदन में जाकर गोली मार दी थी। उधम सिंह शेर दिल स्वतंत्रता सेनानी थे। उधम सिंह ने जलियावाला बाग में मारे गए हिन्दुस्तानियों की मौत का बदला लिया था।

क्यों उधम सिंह ने अपना नाम बदलकर राम मोहम्मद सिंह आजाद रख लिया था
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Udham Singh

Udham singh Jayanti : उधम सिंह ऐसे शेर दिल व्यक्ति थे जिन्होंने जलियावाला बाग हत्याकांड के दोषी माइकल ओ' डायर को लंदन में जाकर गोली मारी थी। उधम सिंह के बचपन का नाम भी शेर सिंह था और उनका जिगरा भी शेरों वाला था। आज उधम सिंह जी की जयंती है।

26 दिसम्बर 1899 को जन्मे उधम सिंह के सर से उनके माता पिता का साया बहुत छोटी उम्र में उठ गया। उधम सिंह जब 2 वर्ष के थे तब उनकी माताजी और 8 साल की उम्र में पिताजी का देहांत हो गया। उधम सिंह का जीवन एक अनाथ-आश्रम में गुजरा जहाँ उधम सिंह अपने बड़े भाई के साथ रहा करते थे। उत्तराखंड में एक जिला है। इस जिले का नाम उधम सिंह के नाम (उधम सिंह नगर) पर ही रखा हुआ है।

उधम सिंह ने क्यों मारी गोली

जलियावाला बाग हत्याकांड की घटना याद करते हुए आज भी लोगों की आँखे नम हो जाती है। उधम सिंह की तो आँखों के सामने वो हत्याकांड हुआ था जिसका गुस्सा उनके मन में था। आपको बता दें कि जलियावाला हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 में हुआ था। ब्रिटिश फौज ने रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर के नेतृत्व में इसको अंजाम दिया था। अब आपको बताते हैं कि उधम सिंह ने माइकल ओ' डायर को गोली क्यों मारी। दरअसल माइकल ओ' डायर उस समय पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर (1912-1919) थे। ओ' डायर ने जलियावाला बाग हत्याकांड को सही ठहराया था। उधम सिंह ने उसी दिन माइकल ओ' डायर को मारने की प्रतिज्ञा ले ली।

उधम सिंह हो गए थे राम मोहम्मद सिंह आजाद

उधम सिंह सच्चे भारतीय थे। उधम सिंह अंग्रेजों की उस नीति में भी नहीं शामिल हुए जिसकी बदौलत भारत गुलाम हुआ था। अंग्रेजों की सबसे बड़ी नीति थी बाटो और राज करो। उधम सिंह सभी धर्मों का सम्मान करते थे। उधम सिंह ने तो अपना नाम भी बदलकर राम मोहम्मद सिंह आजाद रख लिया था। इस नाम में भारत के प्रमुख तीन धर्म आ जाते हैं। आज भी हम उधम सिंह को सही मायने में जानने की कोशिश करेंगे तो पाएंगे कि उनकी लड़ाई किसी खास धर्म या देश के खिलाफ नहीं थी।

21 वर्षों बाद पूरी की प्रतिज्ञा

उधम सिंह ने जलियावाला बाग हत्याकांड का गुस्सा 21 सालों तक अपने अंदर दबाए रखा। लाखों हिन्दुस्तानियों का बदला उधम सिंह ने 1940 में लिया। इससे पहले उधम सिंह कई देशों में रहे और फिर लंदन पहुंचे। लंदन में उधम सिंह ने एक रिवाल्वर खरीद ली थी। लंदन पहुंचने के करीब 6 साल बाद 1940 में उधम सिंह को वो मौका मिल गया जिसकी उन्हें तलाश थी। रॉयल सेंट्रल एशियन सोसाइटी की बैठक में माइकल आने वाले थे। उधम सिंह भी समय से पहले पहुंचे और बैठक के बाद उधम सिंह ने गोलियों से माइकल डायर को छलनी कर दिया। माइकल वहीँ ढेर हो गए। उधम सिंह वहां से भागे नहीं बल्कि खड़े रहे। लगभग चार महीने बाद यानी 31 जुलाई 1940 उधम सिंह को माइकल ओ' डायर के कत्ल के जुर्म में फांसी दी गई।

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