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मध्यप्रदेश में राज्यसभा की दो सीट जीतने के लिए कांग्रेस को भाजपा में लगानी होगी सेंध, ये है अभी का गणित

राज्यसभा के लिए बसपा के संजीव सिंह कुशवाह एवं सपा के राजेश शुक्ला से समर्थन मांग कर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने पार्टी के लिए वोट बढ़ाने की शुरुआत कर दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की पहल पर बसपा के साथ निर्दलीय विधायकों से भी संपर्क साधा जा रहा है।

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राज्यसभा (फाइल फोटो)

राज्यसभा के लिए बसपा के संजीव सिंह कुशवाह एवं सपा के राजेश शुक्ला से समर्थन मांग कर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने पार्टी के लिए वोट बढ़ाने की शुरुआत कर दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की पहल पर बसपा के साथ निर्दलीय विधायकों से भी संपर्क साधा जा रहा है।

विधानसभा में सदस्य संख्या का जो गणित है, इसके अनुसार कांग्रेस तब तक दूसरी सीट हासिल नहीं कर सकती जब तक वह भाजपा विधायकों में तोड़फोड़ करने में सफल नहीं होती। मंत्रिमंडल विस्तार होने पर भाजपा नेतृत्व को भी क्रास वोटिंग का खतरा था, इसीलिए राज्यसभा चुनाव तक के लिए विस्तार को टालने का निर्णय लिया गया है। राज्यसभा के लिए भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया व सुमेर सिंह सोलंकी जबकि कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह एवं फूल सिंह बरैया को प्रत्याशी बनाया है।

एक सीट जीतने चाहिए 52 विधायक

विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 230 है। इसमें से 24 सीटें रिक्त हैं। दो सीटें जौरा और आगर विधायकों के अचानक निधन के कारण रिक्त हैं जबकि 22 सीटों से जीते कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे की वजह से खाली हैं। विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह के अनुसार राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 52 विधायकों के वोटों की जरूरत है।

भाजपा आसानी से जीतेगी दो सीटें

कांग्रेस सपा, बसपा तथा निर्दलीय विधायकों के पूरे 7 वोट हासिल कर ले तब भी भाजपा राज्यसभा की दो सीटें जीतने में कामयाब रहेगी। सदन में अकेले भाजपा की सदस्य संख्या 107 है। राज्यसभा की दो सीटें जीतने के लिए उसे 104 विधायकों की जरूरत है। इस लिहाज से भाजपा के पास 3 वोट जरूरत से ज्यादा है। संभवत: इसीलिए भाजपा अन्य विधायकों के समर्थन का कोई प्रयास नहीं कर रही है।

कांग्रेस को चाहिए 12 अतिरिक्त वोट

22 विधायकों के बगावत के बाद विधानसभा में कांग्रेस सदस्यों की संख्या 92 बची है। बसपा, सपा तथा निर्दलीय सभी 7 विधायक कांग्रेस का समर्थन कर दें तब भी कांग्रेस 99 के आंकड़े तक पहुंचती है जबकि दो सीटें जीतने के लिए जरूरत 104 की है। साफ है कि कांग्रेस को 5 और विधायक चाहिए। यदि चुनाव बराबरी पर लाना है तब भी कम से कम 4 वोटों की जरूरत है। यह भाजपा को तोड़े बगैर संभव नहीं है।

मंत्रिमंडल विस्तार टलने से उम्मीद टूटी

भाजपा में मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले दावेदारों की लंबी कतार है। सभी मंत्री बनने की पात्रता भी रखते हैं। मौजूदा राजनीतिक हालात में भाजपा और मुख्यमंत्री के लिए सभी को मंत्री बना पाना संभव नहीं है। इसकी वजह से असंतोष भड़कने की आशंका थी। कांग्रेस की नजर इस असंतोष पर ही थी। मंत्री न बनने से नाराज भाजपा विधायकों को क्रास वोटिंग के लिए तैयार किया जा सकता था। पर भाजपा नेतृत्व ने राज्यसभा चुनाव तक विस्तार को टालकर कांग्रेस की उम्मीद तोड़ दी। अब कोई चमत्कार ही कांग्रेस को दूसरी सीट दिला सकता है।

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