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International Yoga Day Speech In Hindi : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण, स्कूल-कॉलेज और मंच के इए यहां से करें तैयारी

International Yoga Day Speech In Hindi : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2019 (International Yoga Day 2019) में 21 जून (21 June) को पड़ रहा है। गूगल ट्रेंड (Google Trend) में भी इंटरनेशनल योग डे ट्रेंड (International Yoga Day) कर रहा है। लोग अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण (International Yoga Day Bhashan), अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2019 की थीम (International Yoga Day 2019 Theme), अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर निबंध (International Yoga Day Essay In Hindi), अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस फोटो (International Yoga Day Photo), अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस इमेज (International Yoga Day Image), अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर कविता (International Yoga Day Poem) और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर लेख (International Yoga Day Article) गूगल पर सर्च कर रहे हैं।

International Yoga Day Speech In Hindi : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण, स्कूल-कॉलेज और मंच के इए यहां से करें तैयारी

International Yoga Day Speech In Hindi : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2019 (International Yoga Day 2019) में 21 जून (21 June) को पड़ रहा है। गूगल ट्रेंड (Google Trend) में भी इंटरनेशनल योग डे ट्रेंड (International Yoga Day) कर रहा है। लोग अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण (International Yoga Day Bhashan), अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2019 की थीम (International Yoga Day 2019 Theme), अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर निबंध (International Yoga Day Essay In Hindi), अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस फोटो (International Yoga Day Photo), अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस इमेज (International Yoga Day Image), अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर कविता (International Yoga Day Poem) और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर लेख (International Yoga Day Article) गूगल पर सर्च कर रहे हैं। लेकिन हम आपके लिए लाये हैं लेखिका नेहा द्वारा लिखित हिंदी में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण (International Yoga Day Speech), जिसे आप स्कूल, कॉलेज या किसी मंच के लिए यूज कर सकते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण (International Yoga Day Speech In Hindi

राजपथ से लेकर पॉली हिल तक लेह से लेकर लंदन तक 21 जून मानो योग का विश्व महोत्सव दिवस बन गया है। दुनिया भर के 176 से भी ज्यादा देशों में आज के दिन लोगों ने योग किया। इस तरह न सिर्फ भारत की सांस्कृतिक गरिमा को चांद लगे बल्कि लाइफस्टाइल में योग जैसी गतिविधि को जगह देना एक वैश्विक स्टेटस सिंबल बन गया। 2015 साल संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक योग दिवस मनाया जाने की घोषणा हुई थी।

लेकिन भारत में इसको लेकर एक सामूहिक खुशी की जगह जबरदस्त राजनीति शुरु हो गई थी। यह राजनीति का ही प्रकोप था कि योग को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से इतर हिंदू और मुस्लिमों की आपसी बहस का विषय बना दिया गया था। जबकि हम सब जानते हैं योग की महत्ता तब से है जब आधुनिक राजनीति का जन्म भी नहीं हुआ था। योग की मौजूदगी ही नहीं उसकी महत्ता भी सदियों पुरानी है।

International Yoga Day Speech In Hindi : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण


हालांकि यह भी सही है कि आज की तारीख में योग व्यक्तिगत इच्छा से ज्यादा सोशल स्टेट्स सिंबल बन गया है। पार्कों में, टेलीविजन सेटों में, इंटरनेट आखिर कहां ऐसी जगह है जहां सुबह सुबह जाइए और योग के दर्शन न हों।

मीडिया में भी योग एक खूबसूरत और फैशनेबल प्रोडक्ट की तरह छाया हुआ है। सुंदर चिकनी स्वास्थ्य पत्रिकाओं का तो कहना ही क्या, इनमें योग पर इन दिनों इस तरह विशेषांक निकलते हैं मानो अब दूसरा कोई विषय ही न रह गया हो।

बैठकों, सेमिनारों, पार्कों और जिमों में तो 'योगा' एक ऐसा पूरक शब्द बन गया है जिसके बिना कोई बात ही पूरी नहीं होती। जिधर देखो योग ही योग। डॉक्टर हों या वैज्ञानिक, स्टूडेंट हों या खिलाड़ी, प्रबंधक हों या अभिनेता-अभिनेत्री अथवा प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली सुंदरियां। सब के सब योग के जादू से विमोहित से हो गए हैं।

International Yoga Day Speech In Hindi : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण


आज पूरी दुनिया में योग के प्रति जबरदस्त आकर्षण मौजूद है। विशेषकर उच्च मध्य वर्ग के स्त्री-पुरुषों में इसके प्रति सर्वाधिक आकर्षण है। इससे यह सुखद आशा की जा सकती है कि आने वाले सालों में भारत के षट दर्शनों में से एक 'योग' की विश्वस्तर पर धूम होगी। हालांकि इस आकर्षण को लेकर कुछ समस्याएं भी हैं।

कुछ दशकों पहले तक विश्व स्तर पर योग को लेकर जहां समस्या यह थी कि उसे ढोंग और अंधविश्वास का एक सौम्य विस्तार माना जाता था वहीं आज इसको आधुनिकता के दिखावे का एक जरिया भी माना जाने लगा है। इसमें कुछ गलत भी नहीं है। आज बड़े-बड़े शहरों में योग एक अच्छा खासा कारोबार बन गया है।

सैकड़ों साल पुरानी इस भारतीय विद्या को पिछली सदी में नब्बे के दशक में टेलीविजन के विकास और विस्तार ने एक अखिल भारतीय एकात्मकता प्रदान की थी। उन दिनों धीरेन्द्र ब्रह्मचारी जैसे योगियों के चलते योग उच्च मध्यवर्गीय जीवन शैली में कामिनी काया की आकांक्षा बनकर आया।

International Yoga Day Speech In Hindi : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण


हालांकि ब्रह्मचारी जी पर योग को शारीरिक व्यायाम में बदल देने का आरोप लगता है। लेकिन यह भी सही है कि धीरेन्द्र ब्रह्मचारी जैसे लोगों की मेहनत से ही आज 'प्राणायाम' और 'शीर्षासन' जैसे शब्द आम भारतीयों की जुबान के ही नहीं दुनिया के ज्यादातर चेतनशील लोगों की जुबान के परिचित शब्द हैं।

योग को यह प्रतिष्ठा खुद-ब-खुद नहीं मिल गयी। इसे यह जगह दिलाने में पूरी एक शताब्दी खर्च हुई है। 1960 अैर 1970 के दशकों में योग को लेकर पश्चिमी दुराग्रह बहुत जटिल तथा हास्यास्पद थे। तब योग को आधुनिक विकास की जीवनशैली में अवरोधक की तरह देखा जाता था।

जब तक पर्यावरण सांस लेने लायक बना रहा, जब तक उपभोक्तावाद का उत्साहपूर्ण खुमार जारी रहा, पश्चिम ने योग को व्यंग्यपूर्ण नजरों से ही देखा। उन दिनों पश्चिम में योग को वैज्ञानिक जीवन दर्शन बताना और इसे सिद्ध करना बहुत कष्टकारी काम था।

लेकिन तमाम भारतीय वैज्ञानिकों और बौद्धिकों ने तब यह चुनौती स्वीकार की थी। आज उन्हीं की बदौलत योग अपनी इस प्रतिष्ठापूर्ण जगह पर पहुंच पाया है। निस्संदेह इसमें उन पश्चिमी बौद्धिकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है जिन्होंने इसे दशकों पूर्व बिना किसी दुराग्रह के समझा और अपने समाज में इसे प्रतिष्ठा दिलवाई।

International Yoga Day Speech In Hindi : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण


आज योग न केवल समझदार लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन गया है बल्कि उन तमाम लोगों की जिंदगी का भी हिस्सा बन गया है जो कि भले इसके आध्यात्मिक और वैज्ञानिक पहलू को न समझते हों लेकिन जिन्हें इसके फायदों की समझ है। क्योंकि योग आज तमाम कठिन और असाध्य बीमारियों से छुटकारा पाने का जरिया भी बन चुका है।

कुछ दशकों पहले तक आमतौर पर मंहगे एलोपैथी इलाज प्रतिष्ठा के मानकों की तरह देखे जाते थे। लेकिन आज उल्टा है। आज एलोपैथी को उच्चवर्ग के लोग अपनी जीवन शैली में वह महत्व नहीं देते जो महत्व देसी चिकित्सा पद्धतियों तथा योग को मिलता है। दिल्ली में रहने वाले ज्यादातर सांसद योग के फायदों से परिचित हैं।

इसे पसंद करते हैं। केवल सांसद ही नहीं नौकरशाह और उद्योगपतियों की रोजमर्रा की जिंदगी का भी योग एक अहम हिस्सा है। दिल्ली, मुबई, कोलकाता, चेन्नै ही नहीं लुधियाना, गांधीनगर और त्रिचुरापल्ली जैसे छोटे शहरों में भी योग के अनगिनत केन्द्र खुल चुके हैं और हर दिन खुलते जा रहे हैं। सुबह-सुबह शहरों में पार्कों में ऐसे असंख्य लोगों को देखा जा सकता है जो प्राणायाम या सूर्य नमस्कार करते दिख जाएंगे।

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