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तमिलनाडु के चर्चित सथानकुलम कांड में अदालत के फैसले ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है। लॉकडाउन के दौरान हिरासत में लिए गए पिता-पुत्र की मौत के मामले में कोर्ट ने इसे जघन्य अपराध मानते हुए 9 पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, हिरासत में दी गई यातनाओं के चलते दोनों की मौत हुई थी। इस फैसले को कस्टोडियल हिंसा के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

हालांकि, यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इस तरह के फैसले भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक पाएंगे या सिस्टम में और सुधार की जरूरत है।

सबसे बड़ा सवाल यही है-
क्या यह फैसला पुलिस जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम है या अभी भी सुधार की जरूरत बाकी है?

इसी मुद्दे पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ विशेष चर्चा में न्यायपालिका, प्रशासन और पत्रकारिता से जुड़े विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी।

Debate Panel

  • आदित्य मित्तल – पूर्व न्यायाधीश, हाई कोर्ट
  • रामनिवास – पूर्व DGP, छत्तीसगढ़
  • डॉ. आलोक शुक्ला – पूर्व IAS
  • राजकुमार सिंह – वरिष्ठ पत्रकार

सथानकुलम कांड पर किसने क्या कहा? ऊपर गए वीडियो में देखें पूरी चर्चा

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