नई दिल्ली: गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भारत यात्रा के दौरान देश के डिजिटल भविष्य को बदलने वाला एक ऐतिहासिक ऐलान किया है। पिचाई ने घोषणा की है कि गूगल भारत में अगले कुछ वर्षों में 1.25 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करेगा।
इस निवेश का केंद्र बिंदु आंध्र प्रदेश का विशाखापत्तनम होगा, जिसे गूगल अपने सबसे बड़े 'ग्लोबल एआई हब' के रूप में विकसित करेगा। यह भारत के आईटी इतिहास का एक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
विशाखापत्तनम में बनेगा 'मेगा डेटा सेंटर': आखिर क्या होता है यह?
गूगल इस निवेश का बड़ा हिस्सा विशाखापत्तनम में एक अत्याधुनिक डेटा सेंटर (Data Center) और क्लाउड रीजन बनाने में खर्च करेगा। क्या होता है डेटा सेंटर? सरल शब्दों में कहें तो डेटा सेंटर इंटरनेट की दुनिया का 'दिमाग' और 'गोदाम' होता है। जब आप गूगल पर कुछ सर्च करते हैं, यूट्यूब पर वीडियो देखते हैं, या जीमेल भेजते हैं, तो वह सारा डेटा इन्हीं सेंटर्स में लगी लाखों मशीनों मे प्रोसेस और स्टोर होता है।
भारत को क्या फायदा? अब तक भारत का ज्यादातर डेटा विदेशों के सर्वर में स्टोर होता था। विशाखापत्तनम में डेटा सेंटर बनने से भारतीय डेटा भारत में ही रहेगा, इंटरनेट की स्पीड कई गुना बढ़ जाएगी और डेटा सुरक्षा मजबूत होगी।
'एआई हब' की तैयारी और AI का भविष्य
सुंदर पिचाई ने जोर देकर कहा कि विशाखापत्तनम सिर्फ एक स्टोरेज फैसिलिटी नहीं, बल्कि एक 'एआई हब' होगा।
AI का स्कोप क्या है?
आर्टिफिशिय इंटेलिजेंस (AI) आने वाले दौर की सबसे बड़ी क्रांति है। इसका इस्तेमाल सिर्फ चैटबॉट जैसे Gemini तक सीमित नहीं है।
हेल्थकेयर: AI कैंसर जैसी बीमारियों का पता डॉक्टर से पहले लगा सकता है।
खेती: फसल में कीड़ा लगने से पहले किसान को अलर्ट मिल जाएगा।
शिक्षा: हर छात्र को उसकी भाषा में पढ़ाने वाला पर्सनल AI टीचर मिलेगा।
गूगल का यह हब भारत में ऐसे AI टूल्स बनाएगा जो पूरी दुनिया इस्तेमाल करेगी। यानी भारत अब तकनीक का सिर्फ 'उपभोक्ता' नहीं, बल्कि 'निर्माता' बनेगा।
रोजगार की बहार और स्किल डेवलपमेंट
इतने बड़े निवेश का सीधा असर नौकरियों पर पड़ेगा।
डायरेक्ट और इनडायरेक्ट जॉब्स: डेटा सेंटर के निर्माण, रखरखाव, और टेक्निकल ऑपरेशंस के लिए हजारों इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत होगी।
स्किलिंग प्रोग्राम: गूगल ने ऐलान किया है कि वह इस हब के जरिए भारत के युवाओं को AI और क्लाउड कंप्यूटिंग की ट्रेनिंग देगा। इससे भारतीय छात्रों को गूगल जैसी ग्लोबल कंपनियों में नौकरी मिलना आसान हो जाएगा।
स्टार्टअप्स और छोटी कंपनियों को मिलेगी 'सुपरपावर'
भारत में अभी हजारों स्टार्टअप्स हैं, लेकिन उन्हें हाई-स्पीड कंप्यूटिंग के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो महंगा पड़ता है। इस निवेश के बाद, भारतीय स्टार्टअप्स को अपने घर में ही सस्ती और तेज क्लाउड सेवाएं मिलेंगी। इससे नए ऐप्स, सॉफ्टवेयर और तकनीक बनाने की लागत कम होगी और भारतीय कंपनियां ग्लोबल मार्केट में टक्कर ले सकेंगी।
दक्षिण भारत बनेगा डिजिटल इकोनॉमी का गेटवे
विशाखापत्तनम को चुनने के पीछे गूगल की एक बड़ी रणनीति है। यह शहर समुद्र के किनारे है, जहाँ से अंडरसी इंटरनेट केबल्स को कनेक्ट करना आसान है। गूगल यहाँ से नई इंटरनेट केबल्स बिछाएगा जो भारत को सीधे दक्षिण-पूर्व एशिया और अन्य देशों से हाई स्पीड इंटरनेट से जोड़ेंगी। इससे भारत की डिजिटल इकोनॉमी को वह रफ्तार मिलेगी जिसकी कल्पना अभी हम 4G/5G की दुनिया में कर रहे हैं।