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Lok Sabha Election Online Advertising: लोकसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग शनिवार 19 अप्रैल को खत्म हो गई। पहले चरण के चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा ऑनलाइन विज्ञापनों पर जमकर पैसा बहाया गया। पार्टियों पार्टियों ने अपने एजेंडे और नीतियों को वोटर्स तक पहुंचने के लिए Google और Meta जैसे प्लेटफार्मों पर दिल खोलकर प्रचार किया। ऑनलाइन कैंपेन के जरिए वोटर्स को लुभाने की कोशिश की। पहले फेज के चुनाव से पहले पार्टियों ने ऑनलाइन विज्ञापनों के मद में 36.5 करोड़ रुपए खर्च कर दिए।
Google विज्ञापनों पर कांग्रेस ने खर्चे 12 करोड़
खर्च के विश्लेषण से पता चलता है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने Google विज्ञापनों पर 14.7 करोड़ रुपये खर्च किए। BJP पहले चरण के चुनाव से पहले डिजिटल प्रसार करने के मामले में सबसे आगे रही। वहीं, कांग्रेस और उसके सहयोगी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने Google एड्स के जरिए वोटरों को लुभाने पर 12 करोड़ रुपए खर्च किए। बीजेपी ने जहां अपने गूगल पर कुल विज्ञापनों का 81 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया, वहीं कांग्रेस ने इस प्लेटफॉर्म पर अपने डिजिटल प्रचार मद का 78 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया।
डिजिटल प्रचार पर खर्च में पीछे नहीं YSR कांग्रेस
दिलचस्प बात यह है कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी कुल ऑनलाइन विज्ञापन खर्च में तीसरे स्थान पर है। YSR कांग्रेस ने भी मुख्य रूप से Google और Meta Platform के जरिए डिजिटल प्रचार पर जोर दिया। इसके साथ ही ममता बनर्जी की अगुवाई वाली TMC, ओडिशा के सीएम नवीन पटनाइन की अगुवाई वाली BJD और टीडीपी पार्टी ने भी जमकर डिजिटल प्रचार किया।
YouTube विज्ञापन पर किसने बहाया कितना पैसा
विज्ञापन रणनीतियों पर करीब से नजर डालने पर पता चलता है कि बीजेपी ने अपने डिजिटल प्रचार बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा, लगभग 9.5 करोड़ रुपये, केवल YouTube विज्ञापन पर खर्च किया है। कांग्रेस ने YouTube एड्स पर 7.4 करोड़ रुपए, डीएमके ने 6.8 करोड़ रुपए और वाईएसआर कांग्रेस ने 2.4 करोड़ रुपए खर्च किए। दूसरी पार्टियों ने भी टेक सेवी और युवाओं को टारगेट करने के मकसद से YouTube विज्ञापनों पर मोटी रकम खर्च की।
पार्टियों ने कुछ यूं मैनेज किया अपना ऑनलाइन कैंपेन
ऑनलाइन विज्ञापन के लिए आउटसोर्सिंग के जरिए पैसे खर्च किए गए। अपने ऑनलाइन कैंपेन को मैनेज करने के लिए राजनीतिक पार्टियों ने पेशेवर एजेंसियों को काम पर रखा। डीएमके के लिए डिजिटल प्रचार का कैंपेन डिजाइन करने, किस प्लेटफॉर्म पर कितनी रकम खर्च की जानी है, इसकी रणनीति बनाने की जिम्मेदारी पॉपुलस एम्पाॅवरमेंट नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने निभाई। वहीं, टीएमसी और वाइएसआर कांग्रेस ने इस काम करने के लिए I-PAC काे हायर किया।
अब जानिए किन मुद्दों पर रहा पार्टियों का फोकस
इसके अलावा, राजनीतिक विज्ञापनों ने खास मुद्दों और एक विशेष वोटर वर्ग को टारगेट किया। भाजपा ने मोदी सरकार की उपलब्धियों, युवा सशक्तिकरण, विकास पहल, राम मंदिर मुद्दा और अनुच्छेद 370 को निरस्त करने पर जोर दिया। इसके विपरीत, कांग्रेस ने अपने विज्ञापनों में बेरोजगारी, नौकरी की सुरक्षा, अपने घोषणापत्र के वादे, विकास, लीक हुए दस्तावेजों और किसानों से जुड़े मुदों के जरिए वोटरों को जाेड़ने की कोशिश की। द्रमुक ने अपना ऑनलाइन कैंपेन संविधान को बीजेपी से बचाने, भारत की रक्षा करने, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की नीतियों को बढ़ावा देने और "द्रविड़ मॉडल" को अन्य राज्यों में फैलाने पर केंद्रित किया।
किस पार्टी ने किया कितना खर्च
| पार्टी का नाम | खर्च (करोड़ रुपए में) | प्लेटफॉर्म |
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 14.7 | गूगल, यूट्यूब |
| कांग्रेस | 12.0 | गूगल, यूट्यूब |
| द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) | 12.0 | गूगल, यूट्यूब |
| वाईएसआर कांग्रेस पार्टी | 2.8 | गूगल, मेटा प्लेटफार्म |
