India-France Summit 2026: फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron तीन दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंच चुके हैं। उनकी यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग नई ऊंचाइयों पर है और रणनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि भारत के लिए फ्रांस अब “नया रूस” बनता जा रहा है।
आज मुंबई में प्रधानमंत्री Narendra Modi और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसमें रक्षा, तकनीक और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देने पर चर्चा होगी।
राफेल डील से मजबूत हुआ रक्षा सहयोग
भारत और फ्रांस के संबंधों में रक्षा क्षेत्र केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। हाल के वर्षों में Dassault Rafale लड़ाकू विमानों की खरीद ने दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत द्वारा बड़ी संख्या में राफेल विमानों की खरीद को मंजूरी दिए जाने के बाद रक्षा साझेदारी और गहरी हो सकती है। इससे भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ेगी, साथ ही रखरखाव, प्रशिक्षण, स्पेयर सप्लाई और तकनीकी सहयोग में दीर्घकालिक तालमेल मजबूत होगा।
रक्षा मंत्रियों की बैठक भी अहम
बेंगलुरु में भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh और फ्रांस की रक्षा मंत्री Catherine Vautrin की अगुवाई में भविष्य की रक्षा रूपरेखा पर चर्चा प्रस्तावित है।
रक्षा सहयोग समझौते को अगले 10 वर्षों के लिए नवीनीकृत किए जाने और ‘हैमर’ मिसाइलों के संयुक्त विनिर्माण को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की संभावना जताई जा रही है।
‘नया रूस’ क्यों कहा जा रहा?
दशकों तक रूस भारत का सबसे भरोसेमंद रक्षा साझेदार रहा। अब फ्रांस उच्च तकनीक, सह-विकास और सह-उत्पादन के मॉडल के जरिए दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग का प्रमुख स्तंभ बनकर उभर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी अब सिर्फ खरीददार-विक्रेता संबंध तक सीमित नहीं, बल्कि संयुक्त उत्पादन और तकनीकी हस्तांतरण के नए चरण में प्रवेश कर चुकी है।
रक्षा से आगे भी सहयोग
मुंबई में दोनों नेता ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ का संयुक्त उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा। राष्ट्रपति मैक्रों भारत द्वारा आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में भी भाग लेंगे, जिससे उभरती तकनीकों में नई साझेदारी को दिशा मिल सकती है।
भारत-फ्रांस संबंधों की खासियत यह है कि दोनों देश रणनीतिक स्वायत्तता और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के पक्षधर हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी।
