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Gaganyaan Mission Astronauts: अंतरिक्ष में भारत के पहले स्वदेशी मानव मिशन में 4 अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा। अभी इन्हें इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र (HSFC) में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

Gaganyaan Mission Astronauts: अंतरिक्ष में भारत के पहले स्वदेशी मानव मिशन गगनयान (Gaganyaan Mission) में शामिल 4 एस्ट्रोनॉट के नाम सामने आ चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने मिशन के ऐलान के 5 साल बाद मंगलवार को सार्वजनिक कार्यक्रम में अंतरिक्ष यात्रियों से मुलाकात की। गगनयान मिशन के लिए ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन, ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप, विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला को चुना गया है। ये सभी भारतीय वायुसेना के अधिकारी हैं। बेंगलुरु में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण सुविधा में इनकी लंबे समय से ट्रेनिंग हो रही है। 

ग्रुप कैप्टन और विंग कमांडर
गगनयान मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्रियों का पीएम मोदी ने तिरुवनंतपुरम में इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में पंख देकर सम्मान किया। इनमें इंडियन एयरफोर्स के 3 ग्रुप कैप्टन और 1 विंग कमांडर हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात का खुलासा पहले ही हो चुका था कि गगनयान के चयनित अंतरिक्ष यात्री टेस्ट पायलट होंगे। क्योंकि अंतरिक्ष में देश के पहले मानव मिशन में खामी को कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जा रही थी। इन सभी एस्ट्रोनॉट्स को इनके उड़ान कौशल को ध्यान में ऱखते हुए चुना गया है।

कौन हैं ग्रुप कैप्टन नायर?
केरल के लिए यह गर्व का पल है कि गगनयान मिशन के लिए चयनित चार टेस्ट पायलटों में ग्रुप कैप्टन प्रशांत बी. नायर शामिल हैं। वे मूलरूप से केरल के रहने वाले हैं। मिशन के ऐलान के बाद से ही नायर बीते कुछ सालों से रूस में प्रशिक्षण ले रहे थे। अब वह इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र (HSFC) में गगनयान मिशन को लेकर बारीकियां समझ रहे हैं। साथ ही फिट रहने के लिए एयरफोर्स के साथ उड़ानों की लगातार प्रैक्टिस कर रहे हैं।

Gaganyaan Mission Astronauts
Gaganyaan Mission Astronauts

मिशन के लिए ऐसे हुआ सिलेक्शन?
देश के अहम मिशन के लिए कई टेस्ट पायलटों के आवेदन मिले थे। इसके बाद सितंबर 2019 में बेंगलुरु में हुए पहले फेज के सिलेक्शन में 12 पायलट्स को चुना गया। यह सिलेक्शन भारतीय वायुसेना (IAF) के अंतर्गत काम करने वाले इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन (IAM) ने किया था। इसके बाद फाइनल सिलेक्शन के लिए पायलटों को कई राउंड के दक्षता कौशन से गुजरना पड़ा। इसके बाद अंत में IAM और ISRO ने इन चार अंतरिक्ष यात्रियों का चयन किया। फिर रूस और भारत में इनका प्रशिक्षण हुआ। इन्हें दूसरी एजेंसियों और आर्म्ड फोर्सेस के साथ भी ट्रेनिंग करनी पड़ी है।

2018 में हुआ था मिशन का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2018 में स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान गगनयान मिशन का ऐलान किया था। पहले इस मिशन को 2022 तक पूरा करने का लक्ष्‍य रखा था, लेकिन कोरोना महामारी के चलते इसमें देरी हुई। अब गगनयान मिशन 2024 के आखिर या 2025 की शुरुआत में पूरा होने की उम्मीद है। गगनयान मिशन में गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा गया है। यहां तक की 5 साल की सीक्रेसी के बाद पहली बार मिशन के लिए चयनित अंतरिक्ष यात्री सामने आए हैं। (पढ़ें पूरी खबर...)

क्या है भारत का मानव अंतरिक्ष मिशन?
गगनयान मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की पहल है। गगनयान मिशन के दौरान एक रॉकेट में 4 अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर दूर पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा जाएगा और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा। यह भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन (ह्यूमन स्पेस मिशन) है, जो तीन दिन का होगा।  

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