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Election Boycott 2024: देश भर के 21 राज्यों की 102 लोकसभा सीटों पर शनिवार को पहले चरण में वोटिंग खत्म हीो गई। इस दौरान कई राज्यों में मतदाताओं ने अपनी-अपनी शिकायतों को लेकर लोकसभा चुनावों का बहिष्कार किया है। समुचित बुनियादी सुविधा नहीं होने से लेकर अधूरे वादों काे लेकर मतदाताओं ने वोटिंग का बहिष्कार किया। आईए, जानते हैं कि पहले चरण की वोटिंग के दौरान कौन-कौन सी जगहों पर वोटिंग का बहिष्कार किया गया।
राजस्थान के गांवों में वोटिंग का बहिष्कार
राजस्थान के बीकानेर निर्वाचन क्षेत्र के दसानु और दैयान गांवों में, ग्रामीणों ने बुनियादी सुविधाओं के अभाव और मतदान केंद्रों के दूर स्थित होने का हवाला देते हुए मतदान प्रक्रिया में भाग लेने से इनकार कर दिया। प्रशासन की बार-बार अपील के बावजूद, ग्रामीण बेहतर बुनियादी ढांचे की मांग करते हुए, चुनाव का बहिष्कार करने के अपने फैसले पर अड़े रहे।
ट्रांसफार्मर नहीं मिलने के कारण वोटिंग का बायकॉट
उत्तर प्रदेश के दमखौदा ब्लॉक के इनायतपुर गांव में, निवासियों ने पिछले पांच वर्षों से अपने गांव में ट्रांसफार्मर नहीं होने के कारण मतदान का बहिष्कार कर अपनी नाराजगी जाहिर की। मंत्रियों और अधिकारियों की अपील के बावजूद, ग्रामीण अड़े रहे। पुलिस द्वारा मतदान में लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की कोशिशों के बावजूद बेहद कम मतदान हुआ।
सड़क नहीं मिली तो नहीं डाले वोट
मध्य प्रदेश के जबलपुर के पास एक गांव में बार-बार अनुरोध के बावजूद अधिकारियों द्वारा सड़क नहीं बनाने पर ग्रामीणों ने चुनाव का बहिष्कार किया। नौकरशाही की देरी से तंग आकर धरेहर पंचायत के निवासियों ने अपनी दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए मतदान से दूर रहने का फैसला किया। अधिकारियों की ओर से ग्रामीणों को मनाने की काफी कोशिश हुई लेकिन वोटर्स मतदान करने के लिए तैयार नहीं हुए।
तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले में लोगों ने नहीं किया मतदान
तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले में, कुदालूर लोकसभा क्षेत्र के चार गांवों के मतदाताओं ने मतदान नहीं किया। मतदाताओं का कहना था कि सरकार द्वारा उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। इसलिए वह चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं। जिला अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद, ग्रामीण अपने निर्णय पर अड़े रहे, जिससे मतदान प्रतिशत प्रभावित हुआ।
राजस्थान के धौलपुर जिले में भी हुआ वोटिंग का बहिष्कार
राजस्थान धौलपुर जिले के गुजर्रा कला गांव के लोगों ने सड़क बीते एक दशक से सड़क नहीं बनने से नाराज होकर वोटिंग का बहिष्कार कर दिया। लोगों का कहना था कि पिछले 15 वर्षों से स्थिति बदतर होती जा रही है। स्थानीय नेताओं और जिला प्रशासन के अधिकारियों के पास कई शिकायतें दर्ज होने के बावजूद, ग्रामीणों की सड़क संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसकी वजह से बच्चों को स्कूल जाने और बीमार लोगाें को अस्पताल पहुंचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
गंगाशहर में पोलिंग एजेंट्स पर हमला
राजस्थान के ही गंगाशहर में नोखा रोड पर मतदान केंद्र संख्या 14 पर स्थिति में नाटकीय मोड़ आ गया, जहां गुस्साए ग्रामीणों ने हताशा में आकर पोलिंग एजेंटों पर हमला कर दिया, जिससे कांग्रेस के एक प्रतिनिधि को घटनास्थल से भागना पड़ा। लोगों ने बुनियादी मुद्दों का समाधान न होने के कारण मतदान से दूर रहने का फैसला किया। एक प्राथमिक विद्यालय में स्थापित मतदान केंद्र के बाहर, गांव के 744 मतदाताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।
उत्तराखंड में कई जगहाें पर मतदान का बायकॉट
- उत्तराखंड में भी कई जगहों पर मतदान का बहिष्कार किया गया। बागेश्वर में, ग्रामीणों ने बेहतर सड़कों और पुलों की मांग पूरी नहीं होने के कारण चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने से इनकार कर दिया। नतीजतन, शाम पांच बजे तक किसी भी ग्रामीण ने मतदान केंद्र पर वोट नहीं डाला। प्रशासन के समझाने के प्रयासों के बावजूद, ग्रामीण बेहतर बुनियादी ढांचे की मांग पर अड़े रहे।
- उधर, टिहरी संसदीय क्षेत्र के चकराता विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 12 गांवों में मतदाताओं ने चुनाव को सिरे से नकार दिया। लोगों ने सड़क निर्माण की मांग को लंबे समय से नेताओं और सरकारी अधिकारियों द्वारा नजरअंदाज किए जाने पर नाराजगी जाहिर की। परिणामस्वरूप, इन गांवों के लिए निर्धारित पांच बूथों पर सन्नाटा पसरा रहा, क्योंकि 3,000 से अधिक मतदाताओं ने मतदान नहीं किया।
- रुद्रप्रयाग में, इशाला और रिंगेड गांवों में भी सड़क और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण चुनाव का पूर्ण बहिष्कार किया। ग्रामीण वोट नहीं डालने के अपने फैसले पर अड़े रहे। इसी तरह, केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत गिरियक गांव में, मतदाताओं ने सड़क का निर्माण करने का वादा पूरा नहीं होने का हवाला देते हुए वोट डालने से इनकार कर दिया।
राजस्थान के बिगास मतदान केंद्र पर नहीं पहुंचे लोग
राजस्थान के दौसा विधानसभा क्षेत्र स्थित बिगास मतदान केंद्र पर पोलिंग पार्टियां मतदाताओं का इंतजार करती नजर आई। हालांकि, ग्रामीण जनता हिंगोटिया पंचायत से अलग होने की वजह से पैदा हुई दिक्कतों का हवाला देते हुए चुनाव का बहिष्कार कर दिया। चूंकि परिसीमन के बाद इस क्षेत्र को फिर से ठिकरिया पंचायत को सौंप दिया गया है, इसलिए स्थानीय लोगों को अपने बच्चों के दस्तावेज प्राप्त करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने इसी बात से नाराज होकर वोट नहीं डाला।
