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CAA Notification: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) लागू करने की अधिसूचना जारी की। गृह मंत्री अमित शाह ने फरवरी में ऐलान किया था कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले सीएए लागू होकर रहेगा।

CAA Notification: केंद्र सरकार ने सोमवार शाम नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) की अधिसूचना जारी की। देश में नागरिकता संशोधन कानून लागू होने से तीन पड़ोसी देशों के गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का रास्ता साफ हो गया है। नए कानून से अंतर्गत अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदू, सिख, बौद्ध और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को आधिकारिक तौर पर भारत का नागरिक बनाया जा सकेगा।

गृह मंत्री शाह ने दिए थे सीएए लागू करने के संकेत
गृह मंत्री अमित शाह ने 10 फरवरी को एक कार्यक्रम में CAA लागू करने के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि इस बारे में कोई कंफ्यूजन नहीं रहना चाहिए कि सीएए को लोकसभा इलेक्शन से पहले लागू किया जाएगा। देश के मुस्लिमों को भड़काया गया, संशोधित कानून में किसी भारतीय की नागरिकता छीनने का प्रावधान नहीं है।

तीन देशों के शरणार्थियों को मिलेगा लाभ
नागरिक संशोधन अधिनियम (CAA) दिसंबर 2019 में संसद से पारित हो चुका है। सरकार का कहना है कि सीएए दूसरे देशों के शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए बनाया गया है, न कि किसी की नागरिका छीनने के लिए। इसे लेकर देश में खासकर मुस्लिम समुदाय को भड़काया जा रहा है। CAA से किसी भारतीय की नागरिकता को संकट नहीं है। इस अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। सीएए तो बांग्लादेश और पाकिस्तान से लौटने वाले शरणार्थियों को नागरिकता देगा, जो अत्याचारों के चलते भारत लौटकर आ गए थे। 

क्या है सीसीए? 
नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा संसद में पेश किया गया था। इसमें गैर-मुस्लिम शरणार्थियों जैसे हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। इसके दायरे में वे सभी शरणार्थी आएंगे, जो कि 31 दिसंबर 2014 से पहले बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से लौटकर भारत में बस गए थे। दिसंबर 2019 में सीएए के संसद में पास होने के बाद देशभर में मुस्लिम समुदाय ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया था।

CAA के विरोध में हुए थे प्रदर्शन
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के संसद से पारित होने के बाद राजधानी दिल्ली समेत देश के अन्य राज्यों में मुस्लिम समुदाय ने बड़े पैमाने प्रदर्शन किए थे। इस दौरान दिल्ली के शाहीनबाग में महिलाएं कई महीनों तक धरने पर डटी रही थीं। कोरोना महामारी के दौरान कुछ लोगों की मौत भी हुई थी। मुस्लिमों की मांग है कि संशोधित कानून में उन्हें भी नागरिकता देने का प्रावधान होना चाहिए। 

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