लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक गिरने के बाद भाजपा अब 'संसद से सड़क' तक की लड़ाई लड़ने जा रही है। बिल पास न होने को 'महिलाओं के हक पर हमला' बताते हुए भाजपा ने आज से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का बिगुल फूंक दिया है।

लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन विधेयक (महिला आरक्षण) गिरने के बाद भाजपा ने विपक्षी दलों को घेरने की बड़ी रणनीति तैयार की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बावजूद दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण बिल के फेल होने को भाजपा ने 'महिलाओं के अपमान' से जोड़ दिया है।

भाजपा नेतृत्व ने पूरे देश में विपक्ष के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी का लक्ष्य इस विफलता का ठीकरा कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर फोड़ना है।

​बिल गिरने के तुरंत बाद ही भाजपा की महिला सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। अब पार्टी इसे जन-आंदोलन बनाने की तैयारी में है।

​देश के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे। कई राज्यों में विपक्षी नेताओं के पुतले दहन करने और पदयात्रा निकालने की भी योजना है। भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ता घर-घर जाकर यह बताएंगी कि कैसे विपक्ष ने संसद में महिलाओं को उनका संवैधानिक हक मिलने से रोका।

​गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ और 'परिसीमन' के झूठे डर के कारण इस ऐतिहासिक अवसर को गँवा दिया।

शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष कभी नहीं चाहता था कि महिलाओं को 850 सीटों वाली नई लोकसभा में उनका उचित प्रतिनिधित्व मिले। भाजपा अब जनता के बीच जाकर 'दूध का दूध और पानी का पानी' करेगी।

​दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने भाजपा के इन प्रदर्शनों को अपनी विफलता छिपाने का जरिया बताया है। कांग्रेस और सपा का तर्क है कि सरकार के पास बहुमत नहीं था और उसने जानबूझकर परिसीमन जैसे विवादित मुद्दे को बिल में जोड़कर इसे गिराने का आधार तैयार किया। विपक्ष का कहना है कि वे महिला आरक्षण के समर्थक हैं, लेकिन सरकार की 'चुनावी चालबाजी' के खिलाफ हैं।

​महिला आरक्षण बिल का गिरना और उसके बाद भाजपा का यह देशव्यापी विरोध प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि यह मुद्दा अब 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए एक बड़ा एजेंडा बनने जा रहा है। भाजपा इसे 'नारी शक्ति' बनाम 'विपक्ष' की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है, ताकि आने वाले समय में इसका राजनीतिक लाभ उठाया जा सके।