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गर्ल्‍स में टीनएज प्रॉब्लम्स: न हों परेशान, जानिए क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ

सामान्य तौर पर जब एक लड़की 12 वर्ष की होती है, तब उसमें मेंस्ट्रअल साइकिल की शुरुआत होती है।

गर्ल्‍स में टीनएज प्रॉब्लम्स: न हों परेशान, जानिए क्‍या कहते हैं  विशेषज्ञ

नई दिल्‍ली. टीनएज के दौरान गर्ल्‍स में फिजिकल और मेंटल लेवल पर कई सारे चेंजेज होते हैं। इनके कारण ही उन्हें कई तरह की प्रॉब्लम्स से गुजरना पड़ता है। ऐसे में बगैर परेशान हुए मेडिकल ट्रीटमेंट कराना जरूरी है। टीनएज में होने वाले हार्मोनल चेंजेज के कारण गर्ल्‍स में कई तरह की प्रॉब्लम होने लगती हैं। इन दिनों उन्हें न सिर्फ फिजिकल प्रॉब्लम, बल्कि बिहेवियरल प्रॉब्लम्स भी काफी परेशान करती हैं। जानते हैं, टीनएज में गल्र्स को किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम:
फिजिकल प्रॉब्लम्स में पीसीओएस यानी पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम टीनएज में लड़कियों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। इस सिंड्रोम के होने की मुख्य वजह हार्मोन इंबैलेंस है। इस इंबैलेंस के कारण यंग गल्र्स को इररेग्युलर पीरियड, पिंपल्स, अननेससरी हेयर ग्रोथ (अवांछित बाल उगना) आदि प्रॉब्लम्स हो जाती हैं। पीसीओएस की शुरुआत यंग गर्ल्‍स को तेरहवें-चौदहवें वर्ष में होती हैं। उन दिनों यह बीमारी गंभीर नहीं होती है। लेकिन समय रहते इसका इलाज नहीं कराने पर बांझपन, अत्यधिक बाल उगना, पिंपल्स, मोटापा, डायबिटीज, हार्ट डिजीज, हाई बीपी, एबनॉर्मल ब्लीडिंग आदि प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। कलर थेरेपी - जीवन को बनाएं रंगीन और खुशहाल
इस बीमारी के गंभीर रूप अख्तियार कर लने पर कैंसर भी हो सकता है। समय रहते इसका इलाज करा लेने से सभी परेशानियों से निजात मिल जाती है। इस बीमारी के इलाज के लिए हार्मोनल इंबैलेंस को दूर करना होता है। इसके लिए डॉक्टर मेडिसिन देने के साथ ही लाइफस्टाइल बदलाव की सलाह भी देते हैं। इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए बैलेंस्ड डाइट, रेग्युलर एक्सरसाइज, डेली फिजिकल एक्टिविटीज में इंवॉल्व रहना बहुत जरूरी है।
इररेग्युलर पीरियड्स: टीनएर्जस में इररेग्युलर मेंस्ट्रअल साइकिल आम बात है। इसका कारण भी हॉर्मोनल इंबैलेंस ही होता है। सामान्य तौर पर जब एक लड़की 12 वर्ष की होती है, तब उसमें मेंस्ट्रअल साइकिल की शुरुआत होती है। यह साइकिल जनरली 28 दिनों का होता है। पहले पीरियड्स के होने के बाद के कई महीनों तक पीरियड्स इररेग्युलर ही रहता है।
यह पीरियड अगर दो वर्षों के भीतर रेग्युलर नहीं होता है, तो भविष्य में पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, इस तरह की परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। पीरियड्स के इररेग्युलर होने की वजह जानकर ही डॉक्टर उसका ट्रीटमेंट करते हैं। आमतौर पर यह प्रॉब्लम भी हार्मोनल डिसबैलेंस के कारण ही होती है। इसे दूर करने के लिए डॉक्टर मेडिसिन देते हैं। लाइफस्टाइल में बदलाव और तनाव को कम करने वाले एक्सरसाइज करने की सलाह भी देते हैं।
पेनफुल पीरियड्स: टीनएज में पीरियड्स के दौरान पेट के निचले हिस्से यानी पेड़ में दर्द होना आम बात है। इस पेन को मेडिकल टर्म में डिस्मेनरिया कहा जाता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, पीरियड्स के दौरान होने वाला यह दर्द कम होता जाता है। दर्द कम न होने की स्थिति में पेनकिलर लिया जा सकता है। या फिर डॉक्टर से दिखाकर दवा लेनी चाहिए।
एबनॉर्मल वेजाइनल डिस्चार्ज: वेजाइना के इनर लेयर यानी भीतरी परत के ऊपर छोटे-छोटे ग्लैंड्स और सर्विक्स से होने वाले डिस्चार्ज ही वेजाइनल डिस्चार्ज कहे जाते हैं। हर लड़की में टीनएज की शुरुआत से लेकर मेनोपॉज तक थोड़ा-बहुत डिस्चार्ज होता रहता है। आमतौर पर यह डिस्चार्ज पतला, गाढ़ा और चिपचिपा होता है, जिसका रंग सफेद या हल्के पीले रंग का होता है। कई बार इस एज में डिस्चार्ज से स्मेल आती है।
इस स्थिति में अगर वेजाइना में खुजलाहट, जलन हो, उसमें सूजन आ जाए या वह लाल हो जाए तो यह एबनॉर्मल कंडीशन होती है। ऐसा होने पर वेजाइना में इंफेक्शन भी हो सकता है। इस स्थिति में समय पर मेडिकल चेकअप जरूरी है। चेकअप के दौरान एबनॉर्मल डिस्चार्ज के कारणों को जानकर ही डॉक्टर मेडिसिन प्रोवाइड करते हैं।
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