फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को 30 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। चीटिंग के मामले में दिसंबर 2025 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

Vikram Bhatt fraud case: फिल्म निर्माता-निर्देशक विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने 30 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले में दोनों को अंतरिम जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में हर व्यक्ति को जेल भेजना समाधान नहीं हो सकता।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी को उदयपुर जेल से रिहा करने के निर्देश दिए। कोर्ट में अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि मामले में निर्देशक, उनकी पत्नी और अन्य सभी को जेल में रखना उचित नहीं है। वहीं विरोधी पक्ष ने तर्क दिया कि यह 30 करोड़ रुपये की गंभीर धोखाधड़ी का मामला है। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि आपराधिक मामलों का इस्तेमाल केवल धन वसूली के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता।

क्या है मामला?

यह मामला उदयपुर निवासी और इंदिरा आईवीएफ एंड फर्टिलिटी सेंटर के संस्थापक अजय मुरडिया की शिकायत पर दर्ज हुआ था। आरोप है कि एक फिल्म प्रोजेक्ट के नाम पर करीब 30 करोड़ रुपये लिए गए और उनका दुरुपयोग किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया कि फर्जी बिल बनाकर रकम निकाली गई और धनराशि निजी खातों में ट्रांसफर की गई।

विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को दिसंबर 2025 में मुंबई से गिरफ्तार कर उदयपुर लाया गया था, जहां 7 दिसंबर से वे न्यायिक हिरासत में थे। राजस्थान हाई कोर्ट ने 31 जनवरी को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

इस बीच जनवरी में एक अन्य व्यवसायी ने भी विक्रम भट्ट और उनकी बेटी कृष्णा भट्ट सरदा पर 13.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए मुंबई के वर्सोवा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) कर रही है।