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आईआईएम को छोड़कर सभी संस्थानों में चेंज होगा एमबीए सिलेबस

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद का कहना है कि मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और एमबीए ऑफर करने वाले मैनेजमेंट कॉलेजों और संस्थानों में प्लेसमेंट की स्थिति बेहद खराब है।

आईआईएम को छोड़कर सभी संस्थानों में चेंज होगा एमबीए सिलेबस

नॉन आईआईएम मैनेजमेंट संस्थानों के सिलेबस बदलने की तैयारी की जा रही है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद का कहना है कि मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और एमबीए ऑफर करने वाले मैनेजमेंट कॉलेजों और संस्थानों में प्लेसमेंट की स्थिति बेहद खराब है।

इन संस्थानों के कई छात्रों को नौकरी न मिलने की स्थिति भी सामने आ रही है। इसके पीछे वजह कॉलेजों के आउटडेटेड हो चुके सिलेबस को बताया जा रहा है, इसलिए अब एआईसीटीई मैनेजमेंट कॉलेजों के सिलेबस में बदलाव करेगा।

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) के सिलेबस यथावत रहेंगे। अन्य प्रबंध संस्थानों के सिलेबस में परिवर्तन किया जाएगा। देशभर में करीब तीन हजार मैनेजमेंट संस्थान हैं। इन संस्थानों को जल्द ही नए सिलेबस के अनुसार पढ़ाई करवानी पड़ेगी। अगले शैक्षणिक सत्र से इसे लागू किया जा सकता है।

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आईआईएम का प्रदर्शन बेहतर

आईआईएम रायपुर सहित देश के सभी 20 आईआईएम छात्रों के प्लेसमेंट के बारे में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों को औसतन 10 से 30 लाख सालाना पैकेज मिल रहे हैं। आईआईएम रायपुर के छात्रों का प्लेसमेंट रिकार्ड भी पिछले कुछ सालों में सुधरा है। इसके इतर अन्य मैनेजमेंट संस्थानों में छात्रों के लिए प्लेसमेंट ही ऑफर नहीं हो रहे।

ज्यादातर मैनेजमेंट संस्थानों में आउटडेटेड सिलेबस से पढ़ाई कराई जा रही है। कुछ जगहों पर दशकों से पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं हुआ, जबकि दस सालों में मार्केटिंग और इससे संबंधित सेक्टरों में बड़े बदलाव आए हैं। पुराने सिलेबस के कारण छात्रों को नई जानकारी नहीं मिल पा रही।

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कमेटी तैयार करेगी सिलेबस

सिलेबस अपग्रेड करने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया गया है जो नया कोर्स तैयार करेगी। वर्तमान जॉब मार्केट के ट्रेंड, मार्केटिंग सेक्टर की डिमांड और आईआईएम के काेर्स की समीक्षा करने के बाद नया सिलेबस तैयार होगा।

यही नहीं, शिक्षकों के लिए भी विशेष प्रोग्राम तैयार किए जाएंगे। मैनेजमेंट कॉलेजों में शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए शिक्षकों को टीचिंग-लर्निंग प्रोसेस की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे छात्रों को प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल सिखा सकें।

इसके लिए मॉड्यूल तैयार जाएंगे, जिन्हें एक सेमेस्टर में पूरा किया जाना अनिवार्य होगा।

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