Health Insurance premium: हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम जोखिम, उम्र और कवरेज पर तय होता है। को-पे, डिडक्टिबल और सुपर टॉप-अप से प्रीमियम कम किया जा सकता है।सस्ता प्लान चुनने से पहले सुरक्षा और बजट का संतुलन समझना जरूरी है।

Health Insurance premium: अगर आपने कभी हेल्थ इंश्योरेंस प्लान्स की तुलना की है तो एक बात जरूर नोटिस की होगी कि प्रीमियम में बड़ा फर्क। एक जैसी कवरेज लेने के बावजूद दो लोग अलग-अलग रकम क्यों चुकाते हैं? वजह साफ है: प्रीमियम कोई अंदाजा नहीं, बल्कि जोखिम और कवरेज के आधार पर तय की गई कीमत है।

प्रीमियम असल में है क्या?
हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम वह रकम है जो आप हर महीने या साल भर में चुकाते हैं ताकि आपकी पॉलिसी एक्टिव रहे। बदले में बीमा कंपनी आपके प्लान के अनुसार मेडिकल खर्च कवर करती है। आसान शब्दों में, आप अपने इलाज का आर्थिक जोखिम कंपनी को ट्रांसफर करते हैं। जितना ज्यादा जोखिम, उतना ज्यादा प्रीमियम।

बीमा कंपनियां प्रीमियम कैसे तय करती हैं?
गणित सीधा है। कंपनी अंदाजा लगाती है कि भविष्य में इलाज का कितना खर्च आ सकता और उसी हिसाब से कीमत तय करती है। इसमें कुछ बड़े फैक्टर काम करते हैं, आइए एक-एक कर जानते हैं। 

  • रिस्क प्रोफाइल: उम्र, लाइफस्टाइल और मेडिकल हिस्ट्री।
  • सम इंश्योर्ड: जितनी ज्यादा कवरेज, उतनी ज्यादा संभावित जिम्मेदारी।
  • पॉलिसी फीचर्स: रूम रेंट लिमिट, एड-ऑन, रिस्टोरेशन बेनिफिट जैसे फीचर कीमत बढ़ाते हैं।
  • मेडिकल महंगाई: हर साल इलाज महंगा होता है, प्रीमियम भी उसी हिसाब से बढ़ता है। यानी प्रीमियम इस बात का मिश्रण है कि आप कौन हैं और कितनी सुरक्षा चाहते हैं।

कौन-सी बातें आपके प्रीमियम को प्रभावित करती हैं?
उम्र: उम्र बढ़ने के साथ जोखिम बढ़ता है, इसलिए जल्दी पॉलिसी लेने से प्रीमियम कम लॉक हो सकता है। दूसरा मेडिकल हिस्ट्री और आदतें-पहले से बीमारी, धूम्रपान या हाई-रिस्क लाइफस्टाइल कीमत बढ़ा सकते हैं। तीसरा आप किस शहर में रहते हैं। मेट्रो शहरों में इलाज महंगा है, इसलिए प्रीमियम भी ज्यादा होता है। वहीं, फैमिली फ्लोटर भी एक वजह, जितने ज्यादा मेंबर, उतना बड़ा रिस्क पूल। 

आप कैसे प्रीमियम कम कर सकते? 
कम प्रीमियम का मतलब हमेशा कम सुरक्षा नहीं होता, लेकिन हर बचत के साथ कुछ समझौता जुड़ा होता है।

  • को-पेमेंट: हर क्लेम में एक तय हिस्सा आप देंगे। इससे प्रीमियम घटता है, पर इलाज के वक्त जेब से ज्यादा खर्च होगा।
  • एग्रीगेट डिडक्टिबल: साल में एक तय रकम पहले आप भरेंगे, उसके बाद बीमा लागू होगा।
  • सुपर टॉप-अप प्लान: एक सीमा के बाद अतिरिक्त कवरेज देता है और अपेक्षाकृत सस्ता होता है।
  • मल्टी-ईयर पेमेंट: दो-तीन साल का प्रीमियम एक साथ देने पर छूट मिल सकती है।
  • वेलनेस डिस्काउंट: कुछ कंपनियां हेल्दी आदतों पर बोनस देती हैं।

सबसे सस्ता प्लान चुनना हमेशा समझदारी नहीं। जरूरी है कि आपकी पॉलिसी आपके असली मेडिकल जोखिम और बजट के बीच संतुलन बनाए। को-पे या डिडक्टिबल तभी सही है जब आपके पास इमरजेंसी सेविंग्स हों।

अंत में लक्ष्य सिर्फ आज पैसे बचाना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर वित्तीय सुरक्षा पाना है। सही जानकारी के साथ लिया गया फैसला ही आपको ज्यादा प्रीमियम देने से भी बचाएगा और कम कवरेज के जोखिम से भी।
(प्रियंका कुमारी)