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Wholesale Inflation: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों से पता चला है कि अप्रैल में फैक्ट्री गेट मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतें ऊपर जाने से हुई। 

Wholesale Inflation: लोकसभा चुनावों के बीच आम आदमी को महंगाई का जोरदार झटका लगा है। मंगलवार को देश में थोक महंगाई दर से जुड़े आंकड़े सरकार की ओर से जारी किए गए। इसके मुताबिक, बिजली और फ्यूल (ईंधन) के साथ-साथ खाने-पीने की वस्तुओं खासकर सब्जियों की कीमतों में बेहिसाब बढ़ोतरी के चलते अप्रैल में थोक मुद्रास्फीति (Wholesale Price Index) लगातार दूसरे महीने बढ़कर 1.26 फीसदी हो गई। यह 13 महीने में WPI का सबसे उच्च स्तर है।  

देश की थोक मुद्रास्फीति अप्रैल महीने में थोक महंगाई बढ़कर 1.26% हो गई, यह आंकड़ा मार्च में 0.53% पर था। इससे पहले फरवरी में थोक महंगाई 0.20% और जनवरी में 0.27% पर थी। बता दें कि पिछले साल अप्रैल में थोक महंगाई दर -0.79 फीसदी थी। 

अप्रैल में इन चीजों में महंगाई बढ़ी
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों से पता चला है कि अप्रैल के दौरान फैक्ट्री गेट मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई। खाद्य वस्तुओं में मुख्य रूप से प्याज (59.7 प्रतिशत), सब्जियों (23.6 प्रतिशत), आलू (71.9 प्रतिशत) और धान (12.03 प्रतिशत) की कीमतों में तेजी से फैक्ट्री गेट की भाव पर दबाव आया है। इस बीच, अनाज (8.7 प्रतिशत) और दालों (16.6 प्रतिशत) की कीमतों में गिरावट आई। 

थोड़ी राहत, इन चीजों के दाम घटे
दूसरी ओर, फलों (-1.78 प्रतिशत), अंडे और मांस (0.88 प्रतिशत) और दूध (4.3 प्रतिशत) जैसी प्रोटीन युक्त वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से मार्च के दौरान कुछ राहत मिली है। कपड़ों की कीमतों में (-1.24 प्रतिशत), कागज (-6.93 प्रतिशत), रसायन (-3.61 प्रतिशत), और धातु (-3.65 प्रतिशत) लगातार गिरावट आई है। 

रिटेल महंगाई में आई थी बड़ी गिरावट
इससे पहले जारी हुए आंकड़ों में अप्रैल में खुदरा महंगाई (रिटेल इन्फ्लेशन) दर 11 महीने के सबसे निचले स्तर पर रिकॉर्ड की गई थी। पिछले महीने यह घटकर 4.83% पर आ गई थी। हालांकि, अब अप्रैल में खाने-पीने की वस्तुएं महंगी हुई हैं। दूसरी ओर, मार्च 2024 में महंगाई दर 4.85% पर थी। ग्रामीण महंगाई दर 5.45% से घटकर 5.43% आ गई और शहरी महंगाई दर 4.14% से घटकर 4.11% दर्ज की गई।

देश में कैसे मापी जाती है महंगाई?
भारत में महंगाई का आंकलन दो प्रकार से होता है। एक खुदरा और दूसरा थोक महंगाई। रिटेल महंगाई दर ग्राहकों द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों पर आधारित है। इसे कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) भी कहा जाता है। दूसरी ओर, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का निर्धारण थोक बाजार में कारोबारी स्तर पर कीमतों से किया जाता है।

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