भारतीय शेयर बाजार में हफ्ते की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई, जहां सेंसेक्स 1600 अंक तक टूट गया और निफ्टी 23,600 के नीचे फिसल गया। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका-ईरान तनाव ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है।

मुंबई। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने बाजार की दिशा पर नकारात्मक असर डाला है। सुबह बाजार खुलते ही निवेशकों ने तेजी से बिकवाली शुरू कर दी, जिससे प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ गया। बीएसई सेंसेक्स करीब 1600 अंकों तक टूट गया, जबकि निफ्टी 23,600 के अहम स्तर से नीचे आ गया। यह गिरावट बताती है कि फिलहाल बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाहरी कारकों का असर भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।   

तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव का असर 
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के नजदीक पहुंच गया है, जिससे महंगाई और लागत बढ़ने की आशंका है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव भी बाजार की चिंता का कारण बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम क्षेत्र में तनाव बढ़ने से सप्लाई बाधित होने का खतरा है। भारत जैसे देश, जो तेल आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। इसी कारण निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी है।

सेंसेक्स के 30 में से 29 शेयर गिरावट में हैं। केवल एक शेयर हरे निशान में ट्रेड कर रहा है।

सभी प्रमुख इंडेक्स में गिरावट का दबाव 
सेंसेक्स के साथ-साथ अन्य प्रमुख इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। BSE BANKEX में करीब 2.5% की गिरावट दर्ज की गई, जो बैंकिंग सेक्टर की कमजोरी को दर्शाता है। SENSEX 50 और Next 50 जैसे इंडेक्स भी 2% से ज्यादा नीचे फिसल गए हैं। Bharat 22 Index में भी गिरावट देखने को मिली, जिससे व्यापक बाजार में कमजोरी का संकेत मिलता है। इससे साफ है कि गिरावट केवल कुछ शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे बाजार में फैली हुई है। बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में रहे।

गिरावट के बीच कुछ शेयरों में मजबूती 
गिरते बाजार के बीच कुछ शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन भी किया। EIEL में करीब 12% की तेजी दर्ज की गई, जो निवेशकों की बढ़ी खरीदारी को दर्शाता है। ZYDUS WELL और ACME SOLAR जैसे शेयरों में भी बढ़त देखने को मिली। SPICEJET और STL Tech ने भी सीमित दायरे में सकारात्मक रुख दिखाया। हालांकि, ये तेजी सीमित रही और पूरे बाजार के गिरते रुख को संतुलित नहीं कर पाई। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में अभी भी चुनिंदा अवसर मौजूद हैं।

बिकवाली का दबाव रहा भारी 
दूसरी ओर सुबह-सुबह कई शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। JYOTI CNC में सबसे ज्यादा गिरावट रही, जो 14% से अधिक टूट गया। EASYMYTRIP, INTELLECT और COHANCE जैसे शेयर भी 4-5% तक गिर गए। IIFL Capital में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे वित्तीय शेयरों पर दबाव बढ़ा। यह दर्शाता है कि निवेशक बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली कर रहे हैं। कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच बाजार में डर का माहौल बना हुआ है।

निफ्टी में बड़ी गिरावट है। एनएसई के सभी सेक्टोरल इंडेक्स भी गिरावट में दिख रहे हैं। 

क्या बताते हैं आंकड़े और मार्केट ब्रेड्थ 
मार्केट ब्रेड्थ भी नकारात्मक है, जो गिरावट की व्यापकता को दर्शाती है। इस समय कुल 3588 शेयरों में कारोबार हो रहा है, जिसमें केवल 727 में बढ़त दिख रही है, जबकि 2714 शेयरों में गिरावट है। 147 शेयरों में कोई बदलाव नहीं दिखा। करीब 45 शेयर 52 सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गए, जबकि 24 शेयर निचले स्तर पर हैं। शुरुआती कारोबार में अपर सर्किट में 123 और लोअर सर्किट में 78 शेयर जा पहुंचे हैं। बीएसई का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन भी गिरकर 451.62 लाख करोड़ या 4.87 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर आ गया है।

निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत? 
कुल मिलाकर, बाजार में फिलहाल दबाव और अस्थिरता का दौर चल रहा है। वैश्विक घटनाक्रम, खासकर तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव, बाजार की दिशा तय करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। गिरावट के समय गुणवत्ता वाले शेयरों में धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है। साथ ही, जोखिम प्रबंधन और स्टॉप लॉस का पालन करना बेहद जरूरी है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल पूरी तरह वैश्विक संकेतों पर निर्भर रहेगी।