नई दिल्ली। कंप्यूटर और लैपटॉप खरीदने की योजना बना रहे उपभोक्ताओं के लिए आने वाले समय में खर्च बढ़ सकता है। उद्योग से जुड़े विश्लेषकों के अनुसार इस वर्ष लैपटॉप और डेस्कटॉप की कीमतों में 35 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसके पीछे मुख्य कारण कंप्यूटर के महत्वपूर्ण पुर्जों की कीमतों में तेज वृद्धि और कुछ चिप्स की कमी को बताया जा रहा है। खास तौर पर मेमोरी मॉड्यूल, ग्राफिक्स प्रोसेसर और एंट्री लेवल प्रोसेसर की सप्लाई में दबाव के कारण निर्माण लागत लगातार बढ़ रही है, जिसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है।
3 गुना बढ़ी डीडीआर आरएएम की कीमतें
कंप्यूटर उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे बड़ा प्रभाव मेमोरी चिप्स की कीमतों में आई तेज वृद्धि से पड़ा है। विशेष रूप से डीडीआर आरएएम की कीमतें पिछले कुछ समय में ढाई से तीन गुना तक बढ़ चुकी हैं। इसके अलावा शुरुआती स्तर के प्रोसेसर की कमी भी बाजार को प्रभावित कर रही है, जिसमें Intel के कुछ एंट्री-लेवल चिप्स की सप्लाई सीमित बताई जा रही है। इन दोनों कारणों से कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ रही है और यही वजह है कि लैपटॉप और डेस्कटॉप की कीमतों में धीरे-धीरे वृद्धि शुरू हो गई है।
10 से 12% तक बढ़ी कंप्यूटर की कीमतें
विश्लेषकों के अनुसार अभी तक कंप्यूटर डिवाइस की कीमतों में लगभग 10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जा चुकी है। आने वाले महीनों में इसमें और तेजी आने की संभावना है। अनुमान है कि पहले मार्च के आसपास कीमतों में लगभग 8 से 10 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है और उसके बाद आने वाले महीनों में लगभग 10 प्रतिशत तक और बढ़ोतरी हो सकती है। यदि यह रुझान जारी रहता है तो कुल मिलाकर कीमतें करीब 30 से 35 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। इसका मतलब यह है कि जो लैपटॉप पहले लगभग 30 हजार से 35 हजार रुपये में मिल जाते थे, वे अब करीब 45 हजार रुपये या उससे अधिक कीमत तक पहुंच सकते हैं।
कंप्यूटर के लिए मजबूत रहा पिछला साल
यह स्थिति खास तौर पर छात्रों, घर से काम करने वाले लोगों और पहली बार कंप्यूटर खरीदने वाले ग्राहकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। कीमतें बढ़ने से कई उपभोक्ता अपने अपग्रेड या नई खरीद को टाल सकते हैं। यही कारण है कि बाजार विशेषज्ञों को इस वर्ष कंप्यूटर की कुल बिक्री में कुछ गिरावट आने की संभावना दिखाई दे रही है। उद्योग के आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली संस्थाओं का अनुमान है कि इस वर्ष कंप्यूटर की शिपमेंट में लगभग 7 से 8 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। यह गिरावट इसलिए अहम है क्योंकि पिछले वर्ष कंप्यूटर बाजार के लिए काफी मजबूत साबित हुआ था।
2025 में 1.59 करोड़ कंप्यूटर यूनिट्स बिकी
रिपोर्ट के अनुसार भारत में वर्ष 2025 के दौरान डेस्कटॉप, नोटबुक और वर्कस्टेशन सहित कुल मिलाकर लगभग 1.59 करोड़ कंप्यूटर यूनिट्स की बिक्री हुई थी, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 10 प्रतिशत अधिक थी। यह पहली बार था जब भारत में एक साल में 1.5 करोड़ से अधिक पीसी की बिक्री दर्ज की गई। उस समय बाजार में कई कंपनियों की बिक्री बढ़ी थी, जिनमें एचपी, लेनोवो, डेल, एकर प्रमुख थीं। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर भी कुछ ऐसे कारक हैं जो कंप्यूटर उद्योग की लागत को प्रभावित कर सकते हैं।
सात तिमाहियों तक दिख सकता है यह दबाव
अनुमान है कि कंप्यूटर के पुर्जों की कीमतों में यह दबाव अगले छह से सात तिमाहियों तक बना रह सकता है और संभव है कि कीमतों में स्थिरता वर्ष 2027 के दूसरे हिस्से में जाकर दिखाई दे। इसी वजह से कई कंपनियां और कारोबारी अपने सिस्टम अपग्रेड पहले ही करने की योजना बना रहे हैं, ताकि आगे चलकर उन्हें अधिक कीमत न चुकानी पड़े। कुल मिलाकर मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि तकनीकी उत्पादों की कीमतें वैश्विक सप्लाई चेन, चिप उत्पादन और कच्चे माल की लागत पर काफी निर्भर करती हैं।