India's Forex Reserve: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 10.29 अरब डॉलर घटकर 688.06 अरब डॉलर पर आ गया। आरबीआई के रुपये को संभालने के लिए डॉलर बेचकर बाजार में हस्तक्षेप कर रहा।

India's Forex Reserve: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) में एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 27 मार्च को खत्म हुए हफ्ते में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 10.288 अरब डॉलर घटकर 688.058 अरब डॉलर रह गया।

इससे पहले के हफ्ते में भी भंडार में गिरावट देखी गई थी। उस दौरान रिजर्व 11.413 अरब डॉलर घटकर 698.346 अरब डॉलर पर आ गया था। 

मिडिल ईस्ट संकट के कारण घटा फॉरेक्स रिजर्व
गौरतलब है कि इसी साल 27 फरवरी को विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर दिखने लगा।

भारतीय रुपये पर लगातार दबाव बढ़ रहा
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ा है। रुपये को संभालने के लिए आरबीआई लगातार विदेशी मुद्रा बाजार में दखल दे रहा। केंद्रीय बैंक डॉलर की बिक्री के जरिए रुपये को स्थिर रखने की कोशिश कर रहा है, जिससे फॉरेक्स रिजर्व पर असर पड़ा है। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने कुछ नीतिगत कदम भी उठाए हैं, ताकि गिरावट को काबू में रखा जा सके।

अगर रिजर्व के अलग-अलग हिस्सों की बात करें, तो विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, जो कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं, उनमें 6.622 अरब डॉलर की गिरावट आई है। यह घटकर 551.072 अरब डॉलर रह गई हैं। इन परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की वैल्यू में उतार-चढ़ाव का भी असर शामिल होता है।

सोने के भंडार में भी गिरावट दर्ज की गई है। आरबीआई के अनुसार, गोल्ड रिजर्व 3.666 अरब डॉलर घटकर 113.521 अरब डॉलर रह गया है। वहीं, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स में मामूली बढ़ोतरी हुई है। यह 17 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.649 अरब डॉलर हो गया है।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ भारत की रिजर्व पोजीशन में भी हल्की गिरावट आई है। यह 17 मिलियन डॉलर घटकर 4.816 अरब डॉलर पर आ गई है।

कुल मिलाकर, विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दो हफ्तों से गिरावट का सिलसिला जारी है। इसकी बड़ी वजह वैश्विक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया का तनाव माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि RBI के कदम इस गिरावट को किस हद तक थाम पाते हैं और रुपये को कितनी स्थिरता मिलती है।

(प्रियंका कुमारी)