चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने हालिया श्रमिक असंतोष और फैक्ट्रियों में विरोध प्रदर्शन के बाद अकुशल श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की है। राज्य सरकार के इस कदम से बढ़ती महंगाई से जूझ रहे मजदूरों को राहत मिलेगी। खासकर खाने-पीने की कीमतों में तेज उछाल और गैस सप्लाई में बाधा ने स्थिति को गंभीर बना दिया था। इस फैसले के तहत अब न्यूनतम वेतन लगभग 120 डॉलर से बढ़ाकर 165 डॉलर प्रति माह कर दिया गया है। यह नई दर एक अप्रैल से लागू मानी जाएगी।
विरोध, टकराव और सरकार का हस्तक्षेप
यह निर्णय ऐसे समय आया है जब मानेसर क्षेत्र में मजदूरों ने काम का बहिष्कार किया था। यह इलाका दिल्ली से लगभग 48 किलोमीटर दूर एक प्रमुख औद्योगिक हब है। यहां मारुति सुजुकी और कई ऑटो पार्ट्स कंपनियां स्थित हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और मजदूरों के बीच झड़पें भी हुईं। राज्य के अधिकारी अजय कुमार ने मजदूरों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी लोग शांतिपूर्वक काम जारी रखें।
महंगाई और गैस संकट से बढ़ी परेशानी
मजदूरों की समस्याओं की जड़ में बढ़ती महंगाई और गैस संकट है। खाद्य पदार्थों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे दैनिक खर्च बढ़ गया है। गैस सप्लाई में रुकावट के कारण होटल और ढाबों ने खाने के दाम बढ़ा दिए हैं। कुछ जगहों पर साधारण भोजन की कीमत भी दोगुनी हो गई है। इस स्थिति ने प्रवासी मजदूरों को गांव लौटने के लिए मजबूर किया। भारत इस समय दशकों के सबसे बड़े गैस संकट का सामना कर रहा है।
उद्योगों पर असर और लागत का दबाव
सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए उद्योगों को गैस सप्लाई कम की है। इसका सीधा असर फैक्ट्रियों और उत्पादन पर पड़ा है। अब वेतन वृद्धि के कारण ऑटो उद्योग की लागत और बढ़ने की संभावना है। पहले से ही कच्चे माल की कीमतें ईरान संघर्ष के कारण बढ़ी हुई हैं। टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी कंपनियां पहले ही वाहनों की कीमतें बढ़ा चुकी हैं। मारुति सुजुकी ने भी कीमत बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
मजदूरों को राहत, पर चुनौतियां बरकरार
मजदूरों के लिए यह वेतन वृद्धि कुछ राहत जरूर लेकर आई है। मुनजल शोवा कंपनी के एक कर्मचारी ने कहा कि जो मिल रहा है, उसी में संतोष करना होगा। हालांकि, वास्तविक समस्या महंगाई और अनिश्चित सप्लाई बनी हुई है। कई श्रमिकों का कहना है कि बढ़ती लागत के हिसाब से वेतन अभी भी कम है। औद्योगिक अशांति ने इस सप्ताह कई ऑटो सप्लायर कंपनियों के काम को प्रभावित किया। राज्य सरकार का कहना है कि घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है। छोटे सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।