भारतीय डिफेंस सेक्टर के शेयरों में बुधवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। निफ्टी डिफेंस इंडेक्स करीब 7% तक चढ़ गया और पिछले दो दिनों की गिरावट को खत्म कर दिया। इस तेजी के पीछे वैश्विक राजनीति में बढ़ता तनाव और अमेरिका-यूरोप के रिश्तों में दरार की खबरें अहम वजह रहीं।
दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय सहयोगियों की आलोचना करते हुए उन्हें ईरान से जुड़े संघर्ष में पूरा समर्थन न देने के लिए निशाना बनाया। इस बयान के बाद नाटो देशों के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे।
फ्रांस-इटली ने अमेरिका से झाड़ा पल्ला
फ्रांस, इटली और स्पेन जैसे देशों ने अमेरिका की सैन्य गतिविधियों को लेकर अलग रुख अपनाया। फ्रांस ने अमेरिकी सैन्य विमान को अपने एयरस्पेस से गुजरने की अनुमति नहीं दी, वहीं इटली और स्पेन ने भी इसी तरह के फैसले लिए। इससे अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव बढ़ा है।
नाटो से अमेरिका की दूरी का भारत को फायदा मिल सकता
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका नाटो से दूरी बनाता है, तो यूरोपीय देश अपने रक्षा उपकरणों के लिए नए सप्लायर तलाश सकते हैं। ऐसे में भारत एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर सकता है, क्योंकि यहां डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग तेजी से बढ़ रही।
भारत की डिफेंस कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, भारत की डिफेंस कंपनियों के पास मजबूत ऑर्डर बुक है और वे मिसाइल, ड्रोन, आर्टिलरी और रडार जैसे उपकरणों के निर्यात में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। इसी उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और शेयरों में खरीदारी तेज हुई।
जीआरएसई के शेयरों को लगे पंख
इस तेजी में सबसे ज्यादा फायदा गार्डनरीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स को हुआ, जिसके शेयर करीब 20% तक उछल गए। कंपनी ने हाल ही में वित्तीय वर्ष 2025-26 में 6400 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा टर्नओवर दर्ज किया, जो पिछले साल से 26% ज्यादा है।
बीईएल में भी 6 फीसदी की तेजी
वहीं भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के शेयरों में भी करीब 6% की बढ़त देखी गई। रक्षा मंत्रालय ने बीईएल के साथ 1950 करोड़ रुपये का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट किया है, जिसके तहत भारतीय वायुसेना के लिए माउंटेन रडार खरीदे जाएंगे। कंपनी का सालाना टर्नओवर भी 26,750 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
इसके अलावा डिफेंस इंडेक्स के सभी 19 शेयर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए, जो इस सेक्टर में मजबूत सकारात्मक माहौल को दिखाता है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत-यूरोप और भारत-अमेरिका के रक्षा संबंध और मजबूत हो सकते हैं। ऐसे में आने वाले समय में भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए बड़े मौके खुल सकते हैं।
(प्रियंका कुमारी)