अमेरिका-ईरान तनाव और शांतिवार्ता विफल होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 105 डॉलर के करीब पहुंच गई हैं, जिससे भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में हैं। जानें इस वैश्विक संकट का बाजार और निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा।

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ की है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1600 अंक गिर गया, जबकि निफ्टी भी 23,600 के अहम स्तर से नीचे आ गया है। सुबह-सुबह बाजार में 2 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 10:45 बजे के लगभग गिरावट से कुछ हद तक उबरते हुए 1037.28 अंक 1.34% की गिरावट के साथ 76,512.97 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जबकि निफ्टी 319.20 अंक या 1.33% गिरावट के साथ 23,731.40 पर आ गया है। आज की गिरावट का प्रमुख कारण अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल को माना जा रहा है। 

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर आशंकाएं जारी
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में संपन्न युद्ध विराम वार्ता फेल होने से निवेशकों में भारी असमंजस पैदा हो गया है। इस बीच अमेरिका आज से होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी लागू करने का निर्णय लिया है। उधर ईरान भी अपने रुख पर अडा हुआ है। इसका मतलब है कि फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट का रणनीतिक रास्ते पर आवागमन में बाधाएं कायम रहने वाली हैं। यह स्थिति भारत समेत अनेक देशों के लिए चिंता का विषय है। यह मार्ग बाधिक होने से सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, जिसका संबंध महंगाई से है। 

क्रूड में उछाल से निवेशकों की चिंता बढ़ी
बाजार में गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी है। अमेरिका द्वारा ईरानी समुद्री गतिविधियों को रोकने की कोशिश के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 8 प्रतिशत बढ़कर 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 104.24 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। तेल की कीमतों में इस उछाल ने बाजार में महंगाई और सप्लाई चेन को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का तेल आयात करते हैं, उनके लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण बन सकती है।

वैश्विक बाजारों में दिखा ‘रिस्क-ऑफ’ मूड
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी निवेशकों का रुख सतर्क नजर आ रहा है। एशियाई बाजारों में गिरावट देखने को मिली है, जिससे साफ है कि वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। जापान का निक्केई इंडेक्स करीब 0.4 प्रतिशत नीचे रहा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.4 प्रतिशत तक गिर गया। ऑस्ट्रेलिया का एएसएक्स 200 भी लगभग 0.6 प्रतिशत फिसला। अमेरिकी बाजारों में भी दबाव देखा गया। एसएंडपी 500 के फ्यूचर्स में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

पिछले हफ्ते की तेजी पर लग सकता है ब्रेक
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स 900 अंकों से ज्यादा चढ़कर 77,550 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 275 अंकों की बढ़त के साथ 24,050 तक पहुंच गया था। यह तेजी मुख्य रूप से वैश्विक तनाव में कमी और सकारात्मक निवेश भावना के कारण आई थी। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं और बाजार में फिर से अनिश्चितता बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी पिछले हफ्ते के उत्साह को कम कर सकती है और बाजार में दबाव बढ़ा सकती है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका-ईरान तनाव के चलते वैश्विक बाजारों में जोखिम की भावना बढ़ गई है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई और आर्थिक दबाव की आशंका बढ़ गई है। भारत के लिए यह स्थिति ज्यादा संवेदनशील है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई, रुपये और आर्थिक विकास पर पड़ सकता है। कुल मिलाकर, बाजार में फिलहाल सतर्कता का माहौल है। निवेशकों को आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि यही कारक बाजार की दिशा तय करेंगे।