Home Loan Tips: लोन में को-बॉरोअर वह होता है जो आपके साथ मिलकर पैसा उधार लेता है और ईएमआई की बराबर जिम्मेदारी निभाता है। को-एप्लिकेंट वह व्यक्ति हो सकता है जिसकी आय लोन मंजूरी के लिए जोड़ी जाती है। किसी भी भूमिका को स्वीकार करने से पहले लोन एग्रीमेंट में लिखी जिम्मेदारियों को समझना बेहद जरूरी है।

Home Loan Tips: अगर आपने कभी होम लोन या बड़ा पर्सनल लोन लेने की कोशिश की है, तो बैंक ने शायद आपको किसी और व्यक्ति को भी आवेदन में जोड़ने की सलाह दी होगी। कई बार यह जीवनसाथी होता है, कभी माता-पिता और कभी कमाने वाला बेटा या बेटी।

इसकी वजह सीधी है। बैंक तब ज्यादा सहज महसूस करते हैं जब लोन के पीछे एक से ज्यादा लोगों की जिम्मेदारी हो। दो लोगों की आय होने से लोन चुकाने की क्षमता बढ़ जाती है। साथ ही अगर दूसरे व्यक्ति की क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी हो, तो बैंक को लोन देना और सुरक्षित लगता है।

यहीं से दो शब्द अक्सर सामने आते हैं- को-एप्लिकेंट (Co-applicant) और को-बॉरोअर (Co-borrower)। बहुत से लोग इन दोनों को एक ही मान लेते हैं, लेकिन इनके बीच एक अहम फर्क होता है।

को-बॉरोअर: लोन की पूरी जिम्मेदारी
को-बॉरोअर वह शख्स होता है जो आपके साथ मिलकर लोन लेता है। इसका मतलब है कि लोन चुकाने की जिम्मेदारी दोनों की बराबर होती है। अगर किसी वजह से ईएमआई नहीं चुकाई जाती, तो बैंक दोनों में से किसी से भी पैसा वसूल सकता है। बैंक के लिए 'मुख्य उधारकर्ता' और 'को-बॉरोअर' के बीच ज्यादा फर्क नहीं होता।

होम लोन में यह व्यवस्था सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। उदाहरण के तौर पर पति-पत्नी मिलकर होम लोन लेते हैं। दोनों की आय जोड़कर बैंक लोन की पात्रता तय करता है और दोनों ही ईएमआई के लिए जिम्मेदार होते हैं। कई मामलों में दोनों ही घर के सह-मालिक भी बनते हैं। इसलिए अगर आप किसी के को-बॉरोअर बनते हैं, तो सिर्फ उसकी मदद नहीं कर रहे होते, बल्कि लोन चुकाने की पूरी जिम्मेदारी भी ले रहे होते हैं।

को-एप्लिकेंट: आवेदन में साथ, जिम्मेदारी अलग हो सकती
को-एप्लिकेंट का मतलब थोड़ा अलग हो सकता है। अलग-अलग बैंक इसे अलग तरीके से इस्तेमाल करते हैं। कई मामलों में को-एप्लिकेंट वह व्यक्ति होता है जिसकी आय या वित्तीय स्थिति को लोन मंजूरी के समय ध्यान में रखा जाता है। उदाहरण के लिए, कोई युवा अपना पहला घर खरीद रहा है तो वह अपने माता-पिता को को-एप्लिकेंट बना सकता है, ताकि बैंक ज्यादा भरोसे के साथ लोन दे सके। हालांकि व्यवहार में कई बार लोन मंजूर होने के बाद को-एप्लिकेंट भी ईएमआई की जिम्मेदारी साझा करने लगता है। असली स्थिति इस बात पर निर्भर करती है कि लोन एग्रीमेंट में क्या लिखा है।

लोग को-एप्लिकेंट क्यों जोड़ते हैं?
लोन में दूसरे व्यक्ति को जोड़ने का सबसे बड़ा कारण लोन की पात्रता बढ़ाना होता है। जब दो लोगों की आय गिनी जाती है, तो बैंक ज्यादा रकम का लोन मंजूर कर सकता है। दूसरा कारण मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल है। अगर एक व्यक्ति की क्रेडिट हिस्ट्री बेहतर है, तो बैंक का भरोसा बढ़ता है। होम लोन के मामले में एक और फायदा मिलता है कि अगर दोनों व्यक्ति घर के सह-मालिक हैं, तो वे टैक्स में भी अलग-अलग लाभ ले सकते हैं।

किसी का को-एप्लिकेंट या को-बॉरोअर बनने से पहले एक सवाल जरूर पूछना चाहिए कि अगर ईएमआई बंद हो जाए तो क्या होगा? अगर एग्रीमेंट में संयुक्त जिम्मेदारी लिखी है, तो बैंक आपसे भी पूरी रकम वसूल सकता है, चाहे लोन आपने इस्तेमाल किया हो या नहीं। इसलिए सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि बैंक के दिए गए नामों पर ज्यादा ध्यान देने की बजाय लोन एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें और समझें कि आपकी जिम्मेदारी क्या है।

(प्रियंका कुमारी)