वाशिंगटन डीसी। साल 2025 में अमेरिका का व्यापार घाटा मामूली रूप से घटकर लगभग 901 अरब डॉलर रहा है, जो 2024 में 904 अरब डॉलर था। यह जानकारी अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने जारी की। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों से आने वाले आयात पर डबल डिजिट टैरिफ लगा दिए।
इन टैरिफ का उद्देश्य विदेशी सामान को महंगा बनाकर घरेलू उद्योगों को संरक्षण देना और अमेरिका में विनिर्माण को बढ़ावा देना है। आंकड़ों से पता चलता है कि टैरिफ का असर उतना नहीं हुआ, जितना कि अनुमान लगाया जा रहा था।
आयात निर्यात से बढ़े तो बढ़ता है घाटा
जब आयात निर्यात से अधिक होता है, तो व्यापार घाटा बढ़ जाता है। 2025 में अमेरिका का व्यापार घाटा थोड़ा कम हुआ, यानी निर्यात और आयात के बीच का अंतर कुछ हद तक सिमटा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष अमेरिका के निर्यात में 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि आयात लगभग 5 प्रतिशत बढ़ा।
निर्यात की वृद्धि दर आयात से अधिक रहने के कारण घाटे में हल्की कमी दर्ज की गई। हालांकि साल की शुरुआत में स्थिति अलग थी। यानी टैरिफ नीति का असर मिश्रित रहा है। एक ओर व्यापार अंतर कुछ कम हुआ, वहीं दूसरी ओर आयात-निर्यात की संरचना में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला।
पिछली तिमाही में बढ़ा था व्यापार घाटा
जनवरी से मार्च के बीच अमेरिकी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर विदेशी सामान आयात किया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ लागू होने से पहले वे कम कीमत पर माल मंगा सकें। इस कारण शुरुआती तिमाही में व्यापार घाटा बढ़ गया।
लेकिन साल के बाकी हिस्से में आयात की रफ्तार नियंत्रित रही और निर्यात बढ़ने से कुल मिलाकर घाटा थोड़ा घट गया। टैरिफ वास्तव में एक प्रकार का कर होता है, जिसे अमेरिका में बेचे जाने वाले माल पर सरकार को चुकाना होता है।
अर्थशास्त्रियों ने दी थी महंगाई बढ़ने की चेतावनी
आम तौर पर कंपनियां अतिरिक्त लागत को अपने ग्राहकों पर डाल देती हैं, जिससे उपभोक्ताओं को ऊंची कीमत चुकानी पड़ती है। अर्थशास्त्रियों ने आशंका जताई थी कि डोनाल्ड ट्रंप के रिसिप्रोकल टैरिफ से महंगाई में तेज बढ़ोतरी होगी।
लेकिन, सामने आए आंकड़ों के अनुसार महंगाई पर टैरिफ का उतना असर नहीं दिखा, जितना अर्थशास्त्रियों ने आशंका जताई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा बढ़े टैरिफ से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी। घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।