बांग्लादेश चुनाव: शेख हसीना की सीट से हिंदू उम्मीदवार गोबिंद चंद्र प्रमाणिक का नामांकन रद्द, लगा साजिश का आरोप

बांग्लादेश के गोपालगंज-3 निर्वाचन क्षेत्र से हिंदू नेता गोबिंद चंद्र प्रमाणिक का नामांकन 'अमान्य हस्ताक्षरों' के आधार पर रद्द कर दिया गया है। शेख हसीना की इस पारंपरिक सीट पर 51% हिंदू मतदाता हैं।

Updated On 2026-01-04 19:40:00 IST

नामांकन खारिज होने के बावजूद गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने पीछे हटने से इनकार कर दिया है।

नई दिल्ली : बांग्लादेश में होने वाले आम चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक मामला सामने आया है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के निर्वाचन क्षेत्र गोपालगंज-3 से निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हिंदू नेता और वकील गोबिंद चंद्र प्रमाणिक का नामांकन पत्र रद्द कर दिया गया है।

करीब 51% हिंदू आबादी वाले इस क्षेत्र में प्रमाणिक की उम्मीदवारी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था, लेकिन निर्वाचन अधिकारी द्वारा उनके पर्चे को खारिज किए जाने के बाद अब वहां का सियासी पारा चढ़ गया है।

शेख हसीना के गढ़ में हिंदू वोट बैंक की चुनौती

गोपालगंज-3 सीट ऐतिहासिक रूप से शेख हसीना और अवामी लीग का मजबूत किला रही है। इस बार शेख हसीना की अनुपस्थिति में 'बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत' के महासचिव एडवोकेट गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने यहा से निर्दलीय ताल ठोकने का फैसला किया था।

इस निर्वाचन क्षेत्र की विशेषता यह है कि यहा 50 प्रतिशत से अधिक हिंदू मतदाता हैं। प्रमाणिक का दावा था कि वे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं, जिससे अन्य राजनीतिक दलों के समीकरण बिगड़ते दिख रहे थे।

तकनीकी खामी और 1% हस्ताक्षरों का विवाद

बांग्लादेश के चुनाव नियमों के तहत किसी भी निर्दलीय प्रत्याशी को अपने नामांकन के साथ निर्वाचन क्षेत्र के कम से कम 1 प्रतिशत मतदाताओं के हस्ताक्षर और समर्थन की सूची सौंपनी होती है।

निर्वाचन अधिकारी ने प्रमाणिक के नामांकन को इसी आधार पर रद्द किया कि उनके द्वारा जमा किए गए हस्ताक्षरों में विसंगतियां पाई गईं।

प्रशासन का कहना है कि जांच के दौरान कुछ मतदाताओं ने अपने हस्ताक्षरों की पुष्टि नहीं की, जिसके कारण कानूनी तौर पर उनका पर्चा अमान्य हो गया।

मतदाताओं को डराने और धांधली के गंभीर आरोप

नामांकन रद्द होने के तुरंत बाद गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने स्थानीय प्रशासन और विपक्षी दल बीएनपी के कार्यकर्ताओं पर बड़ा आरोप लगाया है।

उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके समर्थक मतदाताओं को घर-घर जाकर डराया-धमकाया गया। प्रमाणिक का दावा है कि बीएनपी के लोगों ने उन मतदाताओं पर दबाव बनाया जिन्होंने उनके समर्थन में हस्ताक्षर किए थे, ताकि वे चुनाव अधिकारी के सामने मुकर जाएं।

उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश बताया है ताकि हिंदू नेतृत्व को चुनाव से बाहर रखा जा सके।

चुनाव आयोग और उच्च न्यायालय जाने का फैसला

नामांकन खारिज होने के बावजूद गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने पीछे हटने से इनकार कर दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि वह इस 'अन्यायपूर्ण' फैसले के खिलाफ सबसे पहले चुनाव आयोग में अपनी अपील दर्ज कराएंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आयोग उनके पक्ष में फैसला नहीं लेता है, तो वे अपनी उम्मीदवारी को बहाल कराने के लिए उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करेंगे।

प्रमाणिक का कहना है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और जनता के बीच जाएंगे।


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