वीडियो: सियासी चक्रव्यूह में कैसे फंसे कैलाश विजयवर्गीय? इंदौर कांड ने बढ़ाई मुश्किलें; जानिए सच
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 मौतों के बाद सियासी भूचाल। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय विवादों में क्यों घिरे? हरिभूमि–INH की विशेष चर्चा में जानिए पूरा सच।
भारत के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में भागीरथपुरा क्षेत्र की त्रासदी ने प्रदेश की राजनीति को झकझोर कर रख दिया है। दूषित पानी से 16 लोगों की मौत के बाद मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। तीन दशकों से अजेय माने जाने वाले कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) इस समय सियासी दबाव के केंद्र में हैं।
पार्षद से राष्ट्रीय नेता तक का सफर
कैलाश विजयवर्गीय का राजनीतिक सफर असाधारण रहा है। पार्षद से लेकर महापौर, विधायक, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और अब मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री, हर भूमिका में उन्होंने संगठनात्मक मजबूती दिखाई। पश्चिम बंगाल में भाजपा को शून्य से खड़ा कर तृणमूल कांग्रेस के सामने मजबूत विकल्प बनाने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।
दूषित पानी की त्रासदी और बयान का विवाद
भागीरथपुरा में मौतों के बाद जनता में गुस्सा स्वाभाविक था। इसी बीच एक सवाल के जवाब में विजयवर्गीय की भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया। बयान की शैली पर आलोचना हुई, लेकिन उन्होंने तुरंत खेद जताते हुए गलती स्वीकार की,जो उनकी अब तक की छवि से मेल खाता है।
हादसा या सियासी चक्रव्यूह?
अब सवाल यह है कि क्या यह विरोध केवल एक भयावह हादसे की प्रतिक्रिया है, या फिर एक कद्दावर नेता की राजनीतिक जमीन कमजोर करने की कोशिश? विपक्ष इसे प्रशासन की विफलता बता रहा है, जबकि समर्थक इसे सियासी चक्रव्यूह करार दे रहे हैं।
विशेष चर्चा में क्या बोले प्रवक्ता
इस मुद्दे पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने 'सवाल मध्यप्रदेश का' के तहत विशेष चर्चा की। इसमें अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े वक्ताओं ने न सिर्फ अपनी बात रखी, बल्कि कई चौंकाने वाले पहलुओं पर भी रोशनी डाली।
- अरविंद तिवारी (वरिष्ठ पत्रकार)
- बृजगोपाल लोया (भाजपा प्रवक्ता)
- जेपी धनोपिया (कांग्रेस नेता)