यूपी पुलिस में बढ़ रही 'पिंक पावर': 2017 से अब तक चार गुना बढ़ी महिला पुलिसकर्मियों की संख्या
उपनिरीक्षक, पीएसी और जेल वार्डर पदों पर बढ़ती भागीदारी से राज्य में 'पिंक पावर' और महिला सुरक्षा मजबूत हो रही है।
बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा रिकॉर्ड भर्तियां की गई हैं।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था में 'आधी आबादी' की भागीदारी अब एक नया इतिहास रचने की ओर अग्रसर है। राज्य में महिला सशक्तीकरण के संकल्प को दोहराते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस बल में महिलाओं की मौजूदगी तेजी से बढ़ाई जा रही है।
साल 2017 तक जहां प्रदेश में मात्र 10 हजार महिला पुलिसकर्मी तैनात थीं, वहीं आज यह आंकड़ा 44 हजार को पार कर चुका है।
मिशन शक्ति और नई भर्तियों के जरिए उत्तर प्रदेश जल्द ही देश का ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहा महिला पुलिसकर्मियों की संख्या सबसे अधिक 50 हजार से पार होगी।
भर्ती अभियानों से बदला पुलिस का चेहरा
बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा रिकॉर्ड भर्तियां की गई हैं। पिछले वर्ष 60,244 सिपाहियों की बड़ी भर्ती में 12 हजार से अधिक महिलाओं ने अपना स्थान बनाया। वर्तमान में जारी 32,679 सिपाहियों की सीधी भर्ती में भी महिलाओं के लिए विशेष अवसर हैं।
नागरिक पुलिस और पीएसी को मिलाकर लगभग 4500 महिलाओं का चयन सिपाही पद पर होना तय है। इसके अलावा जेल प्रशासन को मजबूती देने के लिए 108 महिला जेल वार्डर के पदों पर भी प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
उपनिरीक्षक और प्लाटून कमांडर के रूप में नेतृत्व
सिपाही ही नहीं, बल्कि पुलिस के नेतृत्वकारी पदों पर भी महिलाओं की संख्या बढ़ाई जा रही है। अगस्त माह में शुरू हुई उपनिरीक्षक भर्ती के जरिए लगभग 1000 महिलाओं को अधिकारी बनने का मौका मिलेगा।
इनमें नागरिक पुलिस के करीब 850 पद और पीएसी की विशेष महिला वाहिनियों में प्लाटून कमांडर के 108 पद शामिल हैं। यह कदम न केवल महिला सुरक्षा को पुख्ता करेगा, बल्कि थानों और वाहिनियों में महिला अधिकारियों की कमी को भी दूर करेगा।
पीएसी की महिला वाहिनियों और होमगार्ड में हिस्सेदारी
प्रदेश सरकार ने महिलाओं के लिए विशेष रूप से पीएसी की तीन महिला वाहिनियों का गठन किया है, जिससे राज्य के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं की त्वरित तैनाती सुनिश्चित हो सके।
इसके साथ ही, होमगार्ड विभाग में भी 42 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जिसमें 20 प्रतिशत पद करीब 8400 महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर महिला स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ेगी।
महिला सुरक्षा के लिए 'मिशन शक्ति' का प्रभाव
पुलिस बल में महिलाओं की बढ़ती संख्या सीधे तौर पर महिला सुरक्षा और जनसुनवाई पर सकारात्मक प्रभाव डाल रही है। वर्तमान में प्रदेश के सभी 1500 से अधिक थानों में 'महिला हेल्प डेस्क' का संचालन महिला पुलिसकर्मियों द्वारा ही किया जा रहा है।
पिंक बूथ, पिंक पेट्रोल और एंटी रोमियो स्क्वाड जैसे अभियानों की सफलता का बड़ा श्रेय इन्हीं 44 हजार महिला पुलिसकर्मियों को जाता है। पुलिस बल में उनकी मौजूदगी बढ़ने से पीड़ित महिलाएं अब अपनी शिकायतें खुलकर दर्ज करा पा रही हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर यूपी की बढ़ती रैंकिंग
प्रतिशत के मामले में लद्दाख (28.3%), आंध्र प्रदेश (21.7%) और बिहार (21.2%) जैसे राज्य वर्तमान में आगे हैं, लेकिन संख्या बल के मामले में उत्तर प्रदेश बहुत जल्द देश का नेतृत्व करेगा।
इस वर्ष के अंत तक 50 हजार का आंकड़ा छूते ही उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक महिला पुलिसकर्मियों वाला राज्य बन जाएगा।
जहा जम्मू-कश्मीर और त्रिपुरा जैसे राज्यों में महिलाओं की भागीदारी 6% से भी कम है, वहीं यूपी का यह ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है, जो राज्य की बदलती सामाजिक और प्रशासनिक तस्वीर का परिचायक है।