UGC New Rules Protest: यूजीसी नियमों को लेकर सवर्ण वर्ग में आक्रोश, सपाक्स ने किया प्रदर्शन
UGC New Rules Protest in MP: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर अब मध्यप्रदेश में भी विरोध तेज हो गया है। सवर्ण वर्ग के लोगों में इन नियमों को लेकर खासा आक्रोश देखने को मिल रहा है।
UGC New Rules Protest
UGC New Rules Protest in MP: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर अब मध्यप्रदेश में भी विरोध तेज हो गया है। सवर्ण वर्ग के लोगों में इन नियमों को लेकर खासा आक्रोश देखने को मिल रहा है। राजधानी भोपाल समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन किए गए। इस दौरान सपाक्स पार्टी ने भी नए यूजीसी कानून का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की।
भोपाल के 7 नंबर इलाके में बड़ी संख्या में लोग हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नए UGC नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों का शोषण बढ़ेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह कानून उन्हें किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
सपाक्स पार्टी का आरोप: भेदभावपूर्ण है नया कानून
प्रदर्शन के दौरान सपाक्स पार्टी के नेताओं ने UGC के नए नियमों को भेदभाव करने वाला कानून बताया। पार्टी का कहना है कि यह नियम एक खास वर्ग को राहत देता है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों को इससे नुकसान उठाना पड़ेगा। सपाक्स नेताओं ने कहा कि यह कानून समान अवसर और न्याय की भावना के खिलाफ है और इससे शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन पैदा होगा।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार से उठाए सवाल
UGC नियमों को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश में कई वर्ग हैं और सरकार को कानून बनाते समय सभी वर्गों की राय को गंभीरता से सुनना चाहिए। सिंघार ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार गांव-गांव जाकर चौपाल और जनसंवाद करती है, तो कानून बनाते वक्त आम लोगों से चर्चा क्यों नहीं होती? उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े फैसले लेते समय सरकार जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर देती है।
बीजेपी का पलटवार: संसद में होती है चर्चा
नेता प्रतिपक्ष के बयान पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। बीजेपी प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसोदिया ने कहा कि किसी भी कानून को संसद में विस्तृत चर्चा और बहस के बाद ही पारित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सांसद जनता के प्रतिनिधि होते हैं और संसद में दी गई राय को जनता की राय माना जाता है। सिसोदिया ने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष खुद संसदीय प्रक्रिया से निकले हुए हैं, इसलिए उन्हें इसकी गरिमा समझनी चाहिए।