IAS-IPS-IFoS Cadre Policy 2026: 2026 से IAS, IPS और IFoS के लिए बदली कैडर आवंटन नीति, 4 समूहों में बांटे गए राज्य; जानिए MP किस ग्रुप में

IAS, IPS और IFoS के लिए 2026 से लागू नई कैडर आवंटन नीति में राज्यों को 4 समूहों में बांटा गया है। जानिए मध्य प्रदेश किस ग्रुप में है और क्या बदले नियम।

Updated On 2026-01-27 16:05:00 IST

केंद्र सरकार ने एक बड़े प्रशासनिक सुधार के तहत अखिल भारतीय सेवाओं- IAS, IPS और IFoS के लिए संशोधित कैडर आवंटन नीति (CAP) को अधिसूचित कर दिया है।

IAS-IPS-IFoS Cadre Policy 2026: केंद्र सरकार ने एक बड़े प्रशासनिक सुधार के तहत अखिल भारतीय सेवाओं- भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFoS) के लिए संशोधित कैडर आवंटन नीति (CAP) को अधिसूचित कर दिया है। यह नई नीति सिविल सेवा परीक्षा और भारतीय वन सेवा परीक्षा 2026 से लागू होगी। सरकार का कहना है कि इससे सेवाओं के अखिल भारतीय चरित्र को मजबूती मिलेगी और राज्यों में अधिकारियों की तैनाती से जुड़ी असमानताओं को दूर किया जा सकेगा।

2017 की व्यवस्था खत्म, नया चार-ग्रुप मॉडल लागू

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने राज्य सरकारों से व्यापक परामर्श के बाद 2017 में लागू क्षेत्रीय प्रणाली को समाप्त कर दिया है। उसकी जगह अब चार समूहों पर आधारित नया ढांचा लागू किया गया है, जिसमें सभी राज्यों और संयुक्त कैडरों को वर्णानुक्रम के आधार पर शामिल किया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य कैडर आवंटन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और संतुलित बनाना है।

चार समूहों में राज्यों का नया बंटवारा

नई नीति के तहत पहले समूह में AGMUT, आंध्र प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार और छत्तीसगढ़ को रखा गया है। दूसरे समूह में गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल और मध्य प्रदेश को शामिल किया गया है। तीसरे समूह में महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और तमिलनाडु आए हैं, जबकि चौथे समूह में तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल को रखा गया है।

रिक्तियों के निर्धारण के लिए तय समयसीमा

संशोधित नीति में कैडर रिक्तियों के निर्धारण को लेकर सख्त और समयबद्ध प्रक्रिया तय की गई है। परीक्षा के बाद वाले वर्ष की 1 जनवरी तक के कैडर अंतर के आधार पर रिक्तियों की गणना की जाएगी। राज्य सरकारों को 31 जनवरी तक अपनी रिक्तियों का प्रस्ताव भेजना अनिवार्य होगा। तय समय के बाद भेजे गए प्रस्तावों पर विचार नहीं किया जाएगा। अंतिम परीक्षा परिणाम से पहले श्रेणीवार रिक्तियों का विवरण सार्वजनिक किया जाएगा।

गृह राज्य कैडर चुनने वालों के लिए कड़े नियम

नई नीति में ‘इनसाइडर’ उम्मीदवारों के लिए नियमों को और स्पष्ट किया गया है। अब किसी अभ्यर्थी को अपने गृह राज्य कैडर में सेवा देने की इच्छा स्पष्ट रूप से दर्ज करनी होगी। इनसाइडर आवंटन अब योग्यता आधारित रोटेशन प्रणाली के अनुसार होगा, जिससे एक ही कैडर में शीर्ष रैंक के उम्मीदवारों की अधिक भीड़ न हो। यदि इनसाइडर रिक्तियां खाली रह जाती हैं तो उन्हें उसी वर्ष आउटसाइडर रिक्तियों में बदल दिया जाएगा।

आउटसाइडर उम्मीदवारों के लिए दो-चरणीय प्रक्रिया

बाहरी उम्मीदवारों के लिए कैडर आवंटन दो चरणों में किया जाएगा। दिव्यांग उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त रिक्तियां सृजित कर उनका समायोजन किया जा सकता है। अन्य आउटसाइडर उम्मीदवारों का आवंटन चारों समूहों में रोटेशनल चक्र के तहत होगा, जिससे लंबे समय में सभी राज्यों में संतुलन बना रहे।

EWS और आरक्षण को लेकर क्या साफ किया गया?

नई कैडर आवंटन नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की रिक्तियों को अनारक्षित श्रेणी के अंतर्गत माना जाएगा। कैडर रोस्टर में इसे उसी अनुसार दर्शाया जाएगा। साथ ही, आरक्षण से जुड़ी किसी भी कमी को दूर करने के लिए योग्य उम्मीदवारों को अनारक्षित रिक्तियों में समायोजित करने का प्रावधान भी रखा गया है।

प्रशिक्षण से पहले तय होगा IAS कैडर

संशोधित दिशा-निर्देशों के मुताबिक, आईएएस अधिकारियों का कैडर लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षण शुरू होने से पहले ही अंतिम रूप ले लेगा। वहीं, आईपीएस और आईएफओएस अधिकारियों का कैडर उनकी नियुक्ति के तुरंत बाद तय किया जाएगा।

सरकार को क्या उम्मीद?

सरकारी अधिकारियों का मानना है कि नई कैडर आवंटन नीति से प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक सुचारू होगी, युवा अधिकारियों को विभिन्न राज्यों में काम करने का बेहतर अनुभव मिलेगा और कैडर आवंटन से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवादों में निष्पक्षता आएगी।

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