Gurugram Land Scam: फर्जी कागजों से बेचा 20 करोड़ का प्लॉट, DETC पर धोखाधड़ी का आरोप, परिवार दर-दर भटकने को मजबूर

शिकायतकर्ता के अनुसार उनके भाई ने 2004 में यह प्लॉट खरीदा था, 2013 में भाई की मौत के बाद परिवार मालिकाना हक के लिए भटकता रहा। DETC ने कंपनी अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी अलॉटमेंट लेटर और जाली बोर्ड रेजोल्यूशन तैयार करवा दिया।

Updated On 2026-01-30 14:36:00 IST

मामले की जानकारी देते डीसीपी अर्पित जैन। 

हरियाणा के साइबर सिटी गुरुग्राम से भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, DETC (डिस्ट्रिक्ट एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर) सरोज देवी पर जाली दस्तावेजों के जरिए करोड़ों की संपत्ति हड़पने का गंभीर आरोप लगा है। सेक्टर-53 की आलीशान सनसिटी सोसाइटी में स्थित इस बेशकीमती प्लॉट की वर्तमान कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इस मामले में सरोज देवी की अग्रिम जमानत याचिका पर आज गुरुग्राम की अदालत में अहम सुनवाई होनी है।

20 साल पुरानी खरीदारी और मालिकाना हक की जंग

इस पूरे विवाद की जड़ें साल 2004 से जुड़ी हैं। शिकायतकर्ता दिनेश के अनुसार उनके भाई अनुराग ने सनसिटी सोसाइटी में प्लॉट नंबर B-30 G खरीदा था। अनुराग ने प्लॉट की पूरी कीमत किश्तों में चुका दी थी और 2005 में कंपनी ने उन्हें अलॉटमेंट लेटर भी सौंप दिया था। विडंबना देखिए कि जिस संपत्ति के लिए पाई-पाई चुकाई गई, उसके मालिक की मौत के बाद परिवार को दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया गया।

मृत्यु के बाद शुरू हुआ फर्जीवाड़े का खेल

साल 2013 में अनुराग के आकस्मिक निधन के बाद उनका बेटा अपनी पढ़ाई के लिए विदेश में था। परिवार ने कई बार कंपनी से संपर्क किया ताकि प्लॉट वारिस के नाम ट्रांसफर हो सके, लेकिन बिल्डर कंपनी ने टालमटोल जारी रखी। सूत्रों का कहना है कि इसी दौरान साजिश रची गई। साल 2020 में कंपनी के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर DETC सरोज देवी और राज बाला ने कथित तौर पर 22 जनवरी 2004 का एक फर्जी अलॉटमेंट लेटर तैयार किया। इसी जाली कागज के आधार पर नवंबर 2020 में तहसील में कन्वेंसेंस डीड भी रजिस्टर करा ली गई।

फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन तैयार किया गया

धोखाधड़ी का यह जाल यहीं नहीं रुका। जांच में सामने आया है कि 12 नवंबर 2020 को कंपनी के कर्मचारियों की मदद से एक फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन तैयार किया गया। इसके जरिए कागजों पर प्लॉट का मालिकाना हक राजबाला और सरोज देवी के नाम दिखाया गया। बाद में, इन्ही जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर 26 जुलाई 2021 को इस प्लॉट को महज 3.40 करोड़ रुपये में नीना चावला को बेच दिया गया। वर्तमान में नीना चावला ने वहां आलीशान मकान भी बना लिया है।

जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की FIR दर्ज

शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि DETC सरोज देवी अपने सरकारी रसूख का इस्तेमाल कर खुद को और अन्य आरोपियों को बचा रही हैं। हालांकि, कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। इस मामले में एक आरोपी नीना चावला की जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। सेक्टर-53 थाने में जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की संगीन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज है।

गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी

डीसीपी हेडक्वार्टर अर्पित जैन के मुताबिक पुलिस मामले की तह तक जाने के लिए सबूत जुटा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है। आज कोर्ट में होने वाली सुनवाई काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे तय होगा कि मुख्य आरोपी अधिकारी को राहत मिलेगी या उन्हें कानून की गिरफ्त में आना होगा। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे 20 साल से इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं और अब उनकी उम्मीदें न्यायपालिका पर टिकी हैं।

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