Delhi HC: दिल्ली स्कूल ट्रिब्यूनल के आदेश लागू करने का ढांचा विकसित हो... हाईकोर्ट ने एलजी को दिए निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि फुल बेंच ने साल 2010 में ही इस बारे में नियम बनाने का सुझाव दिया था, लेकिन डेढ़ दशक के बाद भी इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने अधिकतम तीन माह के भीतर नियम बनाने के निर्देश दिए हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एलजी विनय सक्सेना को दिए निर्देश।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली स्कूल ट्रिब्यूनल द्वारा पारित आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने दिल्ली के एलजी विनय सक्सेना को निर्देश दिया है कि नियम बनाकर या अन्य उपाय अपनाकर अधिकतम तीन महीने के भीतर प्रभावी प्रवर्तन तंत्र विकसित किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने अदालत के पहले के निर्देशों के बावजूद नियमों को बनाने या कानूनी तंत्र स्थापित करने की सरकार की विफलता पर भी असंतोष जताया। कहा कि हाईकोर्ट की फुल बेंच ने साल 2010 में ही इस बारे में नियम बनाने का सुझाव दिया था, लेकिन डेढ़ दशक के बाद भी इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल को अधिकार दिए बिना उसके आदेशों का पालन सुनिश्चित करना संभव नहीं है। हाईकोर्ट ने पूछा कि ट्रिब्यूनल को सशक्त बनाने में आखिर क्या दिक्कत है। आपको नियमों में बदलाव करके या कानूनी रूप से संभव किसी भी तंत्र के माध्यम से न्यायाधिकरण को मजबूत करना होगा।
जस्टिस फॉर ऑल ने जारी की थी याचिका
दिल्ली हाईकोर्ट एनजीओ ‘जस्टिस फॉर ऑल’ द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एलजी विनय सक्सेना को यह निर्देश दिया है। याचिका में कहा गया है कि मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत निजी स्कूलों के कर्मचारियों के पास ट्रिब्यूनल के आदेशों को लागू कराने का कोई प्रभावी तरीका नहीं है।
दिल्ली सरकार ने दी ये दलील
उधर, दिल्ली सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिका कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। दिल्ली कोर्ट की तरफ से बताया गया कि 1973 अधिनियम की धारा 20 और 27 में गैर-अनुपालन के लिए स्कूल प्रबंधन के अधिग्रहण और स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की अनुमति देकर पर्याप्त प्रवर्तन किया गया है। न्यायाधिकरण नियमित रूप से निष्पादन अपीलों की सुनवाई करके अपने आदेशों को लागू कर सकता है।
इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक कानून में स्पष्ट प्रावधान नहीं होगा, तब तक केवल परंपरा या अभ्यास के आधार पर आदेशों का क्रियान्वयन नहीं हो सकता। कोर्ट ने तीन महीने के भीतर स्कूल ट्रिब्यूनल द्वारा पारित आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियम बनाने का निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया है।