Stray Dogs: गाजियाबाद में कुत्तों का आतंक 1 साल में 1.38 लाख लोगों पर हमला, हर महीने 10 हजार से ज्यादा केस
गाजियाबाद में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। पिछले एक साल में 1 लाख 38 हजार से भी ज्यादा कुत्तों द्वारा लोगों को काटने के केस सामने आए हैं। जानिए क्या है पूरा मामला?
गाजियाबाद में आवारा कुत्तों का आतंक
Ghaziabad News: गाजियाबाद में आवारा कुत्तों की समस्या अब बहुत गंभीर हो गई है। शहर की गलियों से लेकर ऊंची इमारतों वाली सोसायटियों तक, कहीं भी लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। कुत्तों के काटने के मामले इतने ज्यादा हो गए हैं कि यह लोगों के लिए जानलेवा बनता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में गाजियाबाद जिले में कुल 1,38,557 डॉग बाइट के मामले दर्ज हुए। यह संख्या बहुत चौंकाने वाली है। तुलना करें तो 2023 में लगभग 71 हजार मामले थे, जो 2024 में 2 लाख से ज्यादा हो गए थे। 2025 में भी यह आंकड़ा 1.38 लाख से ऊपर रहा। इससे प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल उठ रहे हैं।
हर महीने औसतन 10 हजार से ज्यादा केस
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. राकेश कुमार गुप्ता के अनुसार, कुत्तों के काटने की घटनाएं खतरनाक स्तर पर पहुंच गई हैं। पूरे साल का औसत देखें तो हर महीने करीब 10 हजार से ज्यादा लोग कुत्तों का शिकार बन रहे हैं। खासकर साल के आखिरी दो महीने बहुत खराब रहे नवंबर में लगभग 15,000 और दिसंबर में करीब 13,000 मामले आए।
गंभीर हमला
डॉग बाइट के मामलों को स्वास्थ्य विभाग तीन श्रेणियों में बांटता है हल्की, मध्यम और गंभीर। 2025 में कुल मामलों में से लगभग 1 प्रतिशत यानी करीब 1,380 मामले गंभीर श्रेणी के थे। इनमें लोग बुरी तरह घायल हुए और उन्हें लंबा इलाज लेना पड़ा।जागरूकता बढ़ने से रिपोर्टिंग ज्यादा। अच्छी बात यह है कि अब लोग ज्यादा जागरूक हो गए हैं। काटने के बाद तुरंत एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। जिले में 170 स्वास्थ्य केंद्रों पर यह वैक्सीन उपलब्ध है। आशा और एएनएम कार्यकर्ता गांवों और शहरों में लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
नसबंदी कार्यक्रम चल रहा है
आवारा कुत्तों की संख्या कम करने के लिए प्रशासन ABC (एनिमल बर्थ कंट्रोल) कार्यक्रम चला रहा है। अभी दो केंद्र चल रहे हैं नंदग्राम और नए बस अड्डे के पास जहां रोजाना करीब 80 कुत्तों की नसबंदी हो रही है। फरवरी 2026 से तीसरा केंद्र शुरू होने की उम्मीद है, जिससे क्षमता 120 तक बढ़ जाएगी। फिर भी स्थानीय लोग कहते हैं कि ये प्रयास बहुत कम हैं। कई इलाकों में कुत्तों की इतनी संख्या है कि बच्चे और बुजुर्ग शाम को घर से निकलना मुश्किल समझते हैं।