Delhi High Court: एम्स में रात्रि आश्रय बनाने के लिए दान देना अनिवार्य नहीं? दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर वकीलों की प्रतिक्रियाएं

दिल्ली हाईकोर्ट ने AIIMS में मरीजों के लिए रात्रि आश्रय के निर्माण में वकीलों से सहयोग देने का आह्वान किया। हाईकोर्ट की इस अपील ने सोशल मीडिया पर सरकार के दायित्व को लेकर बहस शुरू हो चुकी है। खास बात है कि वकीलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।

Updated On 2026-01-18 17:02:00 IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने एम्स में नाइट शेल्टर बनाने के लिए वकीलों से दान देने का किया था आग्रह।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने AIIMS में मरीजों के लिए रात्रि आश्रय के निर्माण में सहयोग करने के लिए वकीलों से सहयोग देने का आह्वान किया है। हाईकोर्ट ने वकीलों से 3000 बिस्तरों वाले रात्रि आश्रय के निर्माण के लिए दान देने का आग्रह किया ताकि मरीजों और उनके परिजनों को दिल्ली की कड़ाके की सर्दी से बचाया जा सके। यही नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने एम्म के अलावा सभी प्रमुख अस्पतालों के आसपास भी टेंट की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। माननीय उच्च न्यायालय के इस फैसले की जहां सराहना हो रही है, वहीं कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं।

एक्स यूजर शारिक नोमानी ने लिखा कि यह एक अच्छी पहल है बल्कि बहुत अच्छी पहल है। लेकिन राज्य सरकार और केंद्र सरकार क्या कर रही हैं? उनके पास अपार धन है। वे हर संभव स्रोत से धन जुटाते हैं, तो फिर वे 3000 बिस्तरों वाला विश्राम सदन बनाने में योगदान क्यों नहीं दे सकते? उन्होने आगे सवाल पूछा कि वैसे, यह किसका काम है? खैर, सरकार को जो भी करना चाहिए, अब उसका बोझ देश के नागरिकों पर डाल दिया गया है। उम्मीद है कि यह योजना सफल होगी।

रोहित नंद नामक यूजर ने लिखा कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चाहती है कि वकील राजधानी के प्रमुख अस्पताल के बाहर बने रात्रि आश्रय के लिए दान दें। यह सरकार के लिए शर्म की बात है, जो करोड़ों करदाताओं का पैसा दिखावे पर बर्बाद करती है, लेकिन गरीबों को बुनियादी सुविधाएं नहीं दे पाती। इसी प्रकार कई अन्य यूजर हैं, जो कि दिल्ली हाईकोर्ट के मानवीय आदेश को राजनीति से जोड़कर दिल्ली सरकार पर निशाना साध रहे हैं।

दिल्ली के वकीलों ने दिया ये रिएक्शन
खास बात है कि दिल्ली के वकीलों ने इस फैसले पर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं दी हैं। एडवोकेट काजल ने लिखा कि अदालत ने वकीलों से दान करने का आग्रह किया है, न कि इसे उनके लिए अनिवार्य बनाया है। इतनी हिचकिचाहट क्यों। वहीं एडवोकेट एएफ राणा ने पूछा कि क्या सरकार ने लोगों पर टैक्स लगाना बंद कर दिया है? हम अपना पैसा कहां खर्च कर रहे हैं? इसके अलावा कई यूजर्स ऐसे हैं, जो कि मांग कर रहे हैं कि दिल्ली हाईकोर्ट को मामले का संज्ञान लेकर दिल्ली सरकार को आश्रय स्थलों के निर्माण को लेकर सख्त निर्देश देने चाहिए।


दिल्ली में सर्दी का कहर जारी

राजधानी दिल्ली में सर्दी कहर बरपा रही है। गुरुवार को राजधानी का न्यूनतम तापमान 2.9 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था। शुक्रवार को न्यूतनम तापमान 4.3 डिग्री सेल्सियस रहा। आज भी न्यूनतम तापमान 5 डिग्री के नीचे रहा, जिस कारण लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। रात के समय बेघर लोगों को ठिठुरने के लिए विवश होना पड़ रहा है। अब दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर दिल्ली के बड़े अस्पतालों के बाहर टेंट लगाए गए हैं, जिससे खुले आसमान के नीचे रात बिताने वाले मरीजों और परिजनों को राहत मिल पाएगी। 

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