छह साल की मासूम अब देख सकेगी दुनिया: आंबेडकर अस्पताल में कार्निया ट्रांसप्लांट

आंबेडकर अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में कार्निया प्रत्यारोपण कराने वाली यह सबसे छोटी मरीज है। इसके अलावा तीन अन्य लोगों का ट्रांसप्लांट भी सफलतापूर्वक किया गया।

Updated On 2025-08-17 10:07:00 IST

आंबेडकर अस्पताल में कार्निया ट्रांसप्लांट

रायपुर। जीवन में अंधकार लेकर पैदा हुई छह साल की मासूम अब दान में मिली आंखों के जरिए दुनिया देख सकेगी। पैदा होने के बाद ही कॉर्नियल ओपेसिटी की वजह से उसकी दोनों आंखों से दिखाई नहीं पड़ता था। आंबेडकर अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में कार्निया प्रत्यारोपण कराने वाली यह सबसे छोटी मरीज है। इसके अलावा तीन अन्य लोगों का ट्रांसप्लांट भी सफलतापूर्वक किया गया। आंबेडकर अस्पताल के नेत्र रोग विभाग को हाल ही में कार्निया दान में मिला था, जिसकी मदद से लंबे समय से दुनिया देखने की प्रतीक्षा कर रही बच्ची का इंतजार खत्म हुआ।

कार्निया मिलने के बाद चिकित्सकों की टीम ने बच्ची को अस्पताल में भर्ती किया और बड़ी सर्जरी कर उसकी अंधेरी दुनिया में रोशनी भर दी। जन्म से ही कॉर्नियल ओपेसिटी के कारण दोनों नेत्रों से पूर्णतः दृष्टिहीन बालिका की दृष्टि में लगातार सुधार हो रहा है। इसके अलावा तीन अन्य मरीजों का कार्निया प्रत्यारोपण विभागीय चिकित्सकों द्वारा पूरा किया गया। चिकित्सकों के अनुसार मरीजों में शल्य चिकित्सा के बाद संतोषजनक सुधार देखा जा रहा है। कॉर्निया प्रत्यारोपण डॉ. निधि पांडे के मार्गदर्शन में डॉ. रेशु मल्होत्रा, डॉ. स्मृति गुप्ता (कार्निया विशेषज्ञ) तथा डॉ. अंजू भास्कर द्वारा किए गया।

गंभीर बीमारियों के उपचार की सुविधा मौजूद
डाक्टरों के मुताबिक विभाग में नेत्र से संबंधित सामान्य एवं गंभीर बीमारियों के लिए अत्याधुनिक उपचार सुविधा उपलब्ध है। वर्तमान में आधुनिक एवं नवीनतम नेत्र उपचार के उपकरणों में फंडस इमेजिंग कैमरा, बी स्कैन विद यूबीम, डबल फ्रीक्वेंसी ग्रीन लेजर विद स्लिट लैम्प आईएलओ, ऑप्थेल्मिक बायोमेट्री, आटो रिफ्रैक्टर, ओसीटी मशीन, ए स्कैन, किरेटोमीटर, फेको और विट्रेक्टॉमी मशीन इत्यादि उपलब्ध है।

संस्थान के लिए गर्व
आंबेडकर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने बताया कि, नेत्र रोग विभाग द्वारा हासिल की गई यह उपलब्धि न केवल चिकित्सकीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी श्रेष्ठ उदाहरण है। छह वर्षीय बालिका के जीवन में रोशनी लौटाने का प्रयास करना इस संस्थान के लिए गर्व की बात है। यह विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और नेत्रदान करने वाले उन नेत्रदाताओं के सहयोग से संभव हुआ।

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